16 वीं लोकसभा के लिए पश्चिमी उप्र की छह सीटों पर गुरुवार को हुए मतदान के बाद नतीजों में भारी उलटफेर के आसार नजर आ रहे हैं। वर्ष 2009 के चुनाव के मुकाबले मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, सहारनपुर, बागपत और कैराना में वोटिंग इस चुनाव में14 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है।
अधिकतर सीटों पर बढ़े वोटों का ध्रुवीकरण नजर आया है जो नतीजों में भारी उलटफेर कर सकता है।
पिछली बार यहां पर बिजनौर और बागपत रालोद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, कैराना बसपा, मेरठ की सीटें भाजपा के खाते में गई थीं। मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर इस बार लगभग बीस प्रतिशत मतदान प्रतिशत बढ़ा है।
इस सीट पर मुस्लिम वोट बसपा के शाहिद अखलाक और सपा के शाहिद मंजूर के बीच बिखरता नजर आ रहा है। दलित वोट बसपा के साथ दिखाई दिया। हालांकि इस सीट पर मुस्लिम वोटर अक्सर बंटते रहे हैं और इस चुनाव में भी यही रहा।
दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी राजेन्द्र अग्रवाल के पक्ष में ध्रुवीकरण मुकाबले को कड़ा बना रहा है। बागपत में वोट प्रतिशत में इस बार लगभग 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
बागपत सीट पर कड़ा मुकाबला
आमतौर पर चौधरी अजित सिंह की मानी जाने वाली बागपत सीट भी इस बार कड़े मुकाबले में दिखाई दे रही है। जाट-मुस्लिम गठजोड़ के कारण यहां हर बार रालोद की राहें आसान रहती थीं।
पिछली बार भाजपा से गठबंधन का लाभ भी चौधरी अजित सिंह को मिला। इस बार यह समीकरण बिखरता नजर आ रहा है। सपा के गुलाम मोहम्मद मुस्लिम वोटरों में जबरदस्त ढंग से सेंध लगाते दिखाई दिए।
भाजपा से सत्यपाल सिंह के आने के बाद अब यहां जाटों के दो उम्मीदवार होने के कारण भी स्थिति असामान्य दिख रही है। इसके अलावा दलित वोटर बसपा के प्रशांत चौधरी की तरफ दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में यह सीट भी कड़े मुकाबले में है।
बिजनौर में भी 11 प्रतिशत मतदान बढ़ा है। यहां दलित वोटर बंटता नजर आया तो गुर्जर बसपा के मलूक नागर की तरफ लामबंद दिखाई दिए।
रालोद और भाजपा का इस बार गठबंधन नहीं होने और कांग्रेस के परंपरागत वोटों के नहीं जुड़ने से भी यहां मुकाबला कड़ा रहा है। हालांकि मुस्लिम वोटरों का रुझान सपा की तरफ नजर आया पर बसपा ने भी मुस्लिम वोटों ने सेंध लगाई।
मुजफ्फरनगर में बदला समीकरण
यहां भाजपा से कुंवर भारतेन्द्र सिंह, सपा से शाहनवाज राणा, रालोद से जयाप्रदा भी मुख्य मुकाबले में नजर आ रहे हैं। मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में 16 प्रतिशत से ज्यादा वोटों के इजाफे ने यहां भी मुकाबला कड़ा कर दिया है।
सपा यहां मुस्लिम वोटों में सेंध लगाती दिख रही है तो वहीं बसपा की तरफ मुस्लिम वोटरों का रुझान भी खूब रहा। दलित वोटों का कुछ बिखराव भी यहां कड़े समीकरण बना रहा है।
कांग्रेस की तरफ वैश्यों के परंपरागत वोटरों का रुझान मुकाबले को और दिलचस्प बना रहा है, चूंकि इस बार यहां काग्रेस उम्मीदवार वैश्य है।
कैराना लोकसभा क्षेत्र में इस बार 12 प्रतिशत वोटिंग बढ़ने से यहां भी मुकाबला कड़ा है। बसपा का दलित मुस्लिम समीकरण इस बार बिखरता नजर आया।
सहारनपुर में बड़ा ध्रुवीकरण
यहां हुकुम सिंह(भाजपा), नाहिद हसन (सपा) और बसपा के कंवर हसन में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिला। हुकुम सिंह ने रालोद के परंपरागत वोटों में भारी सेंधमारी के साथ ही बसपा के परंपरागत दलित वोट भी सेंध लगा दी है।
रालोद-कांग्रेस गठबंधन के प्रत्याशी करतार सिंह भड़ाना भी मुकाबले में हैं। सहारनपुर लोकसभा क्षेत्र में मुख्य मुकाबला राघव लखनपाल (भाजपा) इमरान मसूद (कांग्रेस), जगदीश राणा सांसद (बसपा) में माना जा रहा है, जबकि सपा के शाजान मसूद की पकड़ कमजोर दिखी।
यहां इमरान को सीधे मुसलिमों का वोट मिलने के साथ ही उसमें सपा के शाजान मसूद सेंध नहीं लगा पाए। इस कारण मुख्य मुकाबले में इमरान मसूद मजबूत दिख रहे हैं, लेकिन भाजपा की तरफ ध्रुवीकरण होने से मुकाबला कड़ा हो गया है।