पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए। लेकिन जब पीने वाले कोई खास ड्रिंक छोड़कर दूसरे की तरफ रुख करते हैं, तो उसके लिए किसी बहाने का इस्तेमाल नहीं करते। कुछ यही वोदका के साथ हुआ है।
टीओआई के मुताबिक देश में वोदका का उपभोग पिछले कैलेंडर वर्ष में 3 फीसदी गिरा। यह दस साल में पहली गिरावट है।
शहरी मध्य वर्ग की जीवनशैली में आ रहे बदलावों की वजह से नौजवान अब उन ड्रिंक या कॉकटेल से भी प्रयोग कर रहे हैं, जो केवल वोदका आधारित नहीं हैं।
पीने वालों की कतार में शामिल होने वाले नौजवानों ने बीते दस साल में वोदका को सालाना 30 फीसदी का इजाफा दिया है।
दिग्गज शराब कंपनी डियाजियो ने अपनी हालिया सालाना रिपोर्ट में भारत में वोदका की लगातार गिरती सेल्स को लेकर चेताया था।
घरेलू बाजार में वोदका की बिक्री 78.4 लाख केस (हर केस में 9 लीटर) रही, जो 2011 में 80.5 लाख केस रही थी।
अलायड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स के एग्जिक्यूटिव वाइस चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर दीपक रॉय ने कहा, 'शॉट हो या कॉकटेल, नौजवानों ने वोदका को इस मुकाम तक पहुंचाया था, लेकिन अब वे शराब की दूसरी किस्मों की ओर बढ़ रहे हैं।'
वोदका के वैल्यू सेगमेंट में मिलकर 50 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले युनाइटेड स्पिरिट्स की व्हाइट मिसचीफ और रोमानोव के वॉल्यूम में 11-11 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है।