पद्म सम्मान को लेकर हमेशा से विवाद होता रहा है लेकिन इस विवाद के साथ कुछ प्रमाण भी दिए जा रहे हैं। 2013 में दिए गए पद्म सम्मान में कई ऐसे नाम हैं जिसकी सिफारिश किसी और ने नहीं बल्कि उनके ही परिवार के लोगों ने की हैं। एक आरटीआई के जरिए इस बात का खुलासा हुआ है।
2013 के पद्म सम्मान को लेकर कांग्रेस कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा, कांग्रेस सांसद टी सुब्बारामी रेड्डी और भारतीय क्लासिकल गायक पंडित जसराज ने कई दर्जन नामों की सिफारिश की थी। इससे भी बढ़कर भारत रत्न लता मंगेशकर ने अपनी बहन उषा मंगेशकर के लिए पैरवी की वहीं, अमजद अली खान ने अपने बेटों अमान और अयान अली बंगश को, समाजवादी पार्टी से निष्कासित अमर सिंह ने सांसद जया प्रदा की पैरवी की।
यह खुलासा तब हुआ जब समाज के लिए काम करने वाले एस सी अग्रवाल ने एक आरटीआई में गृह मंत्रालय से इस बाबत जानकारी मांगी। अग्रवाल ने उन अधिकारियों या लोगों की सूची मांगी जिन्होंने कौन से लोगों को पद्म सम्मान देने की सिफारिश की थी।
इस आरटीआई से मिले जवाब ना केवल चौंकाने हैं। मोतीलाल वोरा ने 25, पंडित जसराज ने 11 और संसदीय कार्यमंत्री राजीव शुक्ला ने इस सम्मान के लिए सात लोगों की सिफारिश की।
इन सब के अलावा जिन मंत्रियों ने कई लोगों की सिफारिश की है उनमें, सलमान खुर्शीद, चरण दास महंत, वी नारायणसामी और मुल्लापल्ली रामचंद्रन प्रमुख हैं।
अग्रवाल ने सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पद्म सम्मान मिलने के तुरंत बाद सरकार को इस सूची को सार्वजनिक करना चाहिए था। यह सत्य अब सबके सामने आ गया है कि कैसे एक आदमी बिना किसी पुख्ता प्रमाण के केवल अपने हित को साधने के लिए लोगों की सिफारिश कर रहे हैं। इससे साबित हो गया है कि इस राष्ट्रीय सम्मान के लिए भारी लॉबिंग होती है।