भूमाफिया को फायदा पहुंचाने के लिए राजस्व अधिकारियों ने 482 एकड़ का पूरा गांव (गौतमबुद्ध नगर के नगला-नगली और नगला शादपुर) ही नक्शे से उड़ा दिया। राजस्व रिकार्ड में अब इस जमीन का कहीं अता-पता नहीं है। एअरफोर्स के लिए 1950 में अधिग्रहीत की गई इस जमीन का रिकार्ड अब खुद एअरफोर्स के पास भी नहीं है। जनहित याचिका के जरिए यह मामला हाईकोर्ट के समक्ष आने पर अधिकारियों ने रिकार्ड दे पाने में हाथ खड़े कर दिए। अधिकारियों से जब जवाब तलब किया तो पता चला कि राजस्व विभाग के पास कोई भी दस्तावेज मौजूद नहीं है। मौजूदा समय में जमीन पर भूमाफियाओं के कब्जा करने का आरोप है।
हाईकोर्ट में अजीत सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डा. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति एमके गुप्ता की पीठ ने प्रमुख सचिव राजस्व, अध्यक्ष राजस्व परिषद् और सेना के अधिकारियों से विस्तृत जवाब तलब किया है। उनसे जमीन के रिकार्ड प्रस्तुत करने को कहा गया है। पीठ ने सर्वेयर जनरल ऑफ इंडिया को विवादित स्थल का सर्वे कर अपनी रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। याचिका में घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। पीठ ने कहा कि मौजूदा मामले को देखते हुए याची की मांग सही प्रतीत होती है मगर अधिकारी पहले जवाब दाखिल करें।
याची के वकील अनूप त्रिवेदी के मुताबिक इससे पूर्व हाईकोर्ट ने 25 फरवरी 2015 को डीएम और मुख्य राजस्व अधिकारी से विवादित भूमि को संरक्षित करने तथा जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। अधिकारियों की ओर से मंगलवार को जवाब दिया गया कि उनके पास इस गांव का कोई रिकार्ड नहीं है। रिकार्ड सेना के पास होना चाहिए जबकि एअरफोर्स के अधिकारियों ने कहा कि उनके पास रिकार्ड नहीं है। रिकार्ड राजस्व विभाग के पास होना चाहिए।