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विहिप चाहती है राम मंदिर की ओर लौटे भाजपा

Thu, 31 Jan 2013 08:01 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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विश्व हिंदू परिषद (विहिप) चाहती है कि भाजपा फिर से अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के मुद्दे को जोरशोर से उठाए। इसके लिए विहिप ने भाजपा पर राम मंदिर को फिर से राजनीतिक एजेंडा में लाने का दबाव बढ़ा दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा नेताओं के साथ साझा बैठक में विहिप नेताओं ने कहा कि संघ परिवार को राम मंदिर और हिंदू आतंकवाद जैसे मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाना चाहिए।
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विहिप की कोशिश है कि नौ राज्यों के विधानसभा व लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राम मंदिर का मसला फिर से गरमाया जाए। भाजपा ने भी विहिप की लाइन पर चलने के संकेत दिए हैं। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने बृहस्पतिवार को कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की मांग हमारी ही नहीं पूरे देश की है।

करोड़ों हिंदू चाहते हैं कि वहां राम मंदिर बने। बहरहाल, संघ परिवार के प्रमुख संगठनों की यह समन्वय बैठक थी, जो हर तीन माह में होती रहती है। वैसे इस बार यह लंबे समय बाद हुई। यह बैठक इसलिए भी खास थी, क्योंकि राजनाथ सिंह भाजपा के नए अध्यक्ष बने हैं।
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साथ ही विहिप के मार्ग दर्शक मंडल की 6 फरवरी से इलाहाबाद में बैठक है। इस बैठक में विहिप नेता राम मंदिर, हिंदू आतंकवाद, सीमा पर भारतीय जवानों के सिर काटे जाने जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार विहिप का कहना था कि इलाहाबाद में जारी कुंभ मेले का संघ परिवार खासतौर पर भाजपा कोई फायदा नहीं उठा पा रही है। उत्तर प्रदेश में भाजपा हाशिए पर है, इसके बावजूद वह राम मंदिर जैसे मुद्दे को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही है।

इसी तरह केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के हिंदू आतंकवाद के बयान को भी विहिप बड़ा मुद्दा बनाए जाने के पक्ष में है। बैठक में संघ की ओर से भैय्या जी जोशी व सुरेश सोनी, विहिप से अशोक सिंहल, प्रवीण तोगड़िया, चंपत राय व दिनेश चंद्र तथा भाजपा की ओर से लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज और मुरली मनोहर जोशी शामिल हुए।

बैठक के बाद भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि यह समन्वय बैठक थी। उन्होंने इन अटकलों को खारिज कर दिया कि बैठक में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि यह मामला भाजपा का संसदीय बोर्ड तय करता है।
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