हिंदू संगठनों ने भी पैगंबर मोहम्मद पर कथित हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी के बयान की निंदा करते हुए उन्हें कड़ा दंड देने की वकालत की है। मगर उनके बयान के खिलाफ मुस्लिमों के उग्र प्रदर्शन और ईनाम राशि के फतवे को भी उन्होंने गलत करार दिया है। कमलेश के बयान और उसके बाद के हालात दोनों को ही गलत करार देते हुए हिंदू संगठनों ने मुस्लिम धर्मगुरूओं और बुद्धिजीवियों से आह्वान किया है कि वे कानून को अपने हाथ में न लें। इससे किसी भी धर्म का भला नहीं होगा। बल्कि देश की धार्मिक सदभाव को चोट पहुंचेगी।
मुस्लिमों के उग्र प्रदर्शन को विहिप ने असहनशीलता करार दिया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि यदि मुस्लिमों की तरह हिंदूओं ने भी प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी तो क्या होगा यह समझ से परे हैं। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा है कि यह प्रदर्शन मुस्लिमों के मानसिकता को दर्शाता है। उनके उग्र मानसिकता का ही परिणाम है कि पूरे देश-दुनिया में उनके खिलाफ लहर बह रही है। उन्होंने कहा कि जब हिंदू धर्म और उसके देवी देवताओं के खिलाफ कोई बयानबाजी होती है तो ये मुस्लिम संगठन कहां रहते हैं। लेकिन जब उनके पैगंबर के खिलाफ टिप्पणी हुई है तो वे देशभर में उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने सेक्युलर राजनीति की वकालत करने वाले सियासी दलों पर भी प्रहार किया है। विहिप नेता ने कहा कि ओवैसी सरीखे लोग जब भगवान राम, सीता और तमाम देवी देवताओं पर गलत टिप्पणी करते हैं तो कोई भी उसकी निंदा नहीं करता है।