अतिक्रमण किए घर में रह रही महाराष्ट्र की एक महिला सरपंच को अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने जायज ठहराया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि जन प्रतिनिधियों केइस तरह का आचरण स्वीकार योग्य नहीं है। इससे पहले बांबे हाईकोर्ट ने भी उसकी याचिका खारिज कर दी थी।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सरपंच पर्वताबाई की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट केफैसले में दखल देने का कोई कारण नहीं बनता। महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम के प्रावधान केतहत पर्वताबाई की ग्राम पंचायत में सदस्यता खत्म कर दी गई थी।
शीर्ष अदालत ने इस निर्णय को सही ठहराते हुए महिला सरपंच को किसी तरह की राहत देने से इनकार किया है। पीठ ने कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि अतिक्रमण किए घर में रहेगा तो दूसरे लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।