राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ललित गेट विवाद से अभी उबरी भी नहीं हैं कि अपनों ने ही उनके खिलाफ ताल ठोक दिया है। संघ ने राजे सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का निर्णय लिया है। मंदिर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले संघ के कार्यकर्ता बृहस्पतिवार को राजे सरकार के खिलाफ पूरे जयपुर शहर का चक्का जाम करेंगे।
हालांकि, मामले में बीच बचाव के लिए भाजपा के सह संगठन महामंत्री वी सतीश जयपुर जमे हुए हैं। वह सरकार और संघ के बीच सुलह की कोशिश में हैं। मगर राज्य का संघ नेतृत्व राजे से आरपार के मूड में है।
बताया जा रहा है कि जयपुर मेट्रो के निर्माण के दौरान तोड़े या स्थानांतरित किए गए 84 मंदिरों को मुद्दा बनाते हुए संघ ने राजे सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का निर्णय लिया है।
रविवार को प्रदेश के संघ नेतृत्व ने राजे के मंत्रियों और सूबे से चुने गए भाजपा सांसदों को तलब कर उन्हें सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने का फरमान जारी किया था।
सांसद एवं मंत्रियों के लिए मुश्किल यह है कि उन्हें अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने की रणनीति का हिस्सा बनना पड़ रहा है। संघ का यह कदम बेशक उजड़े मंदिरों को बचाने के नाम पर है। मगर सियासी गलियारे में इसे राजे को घेरने की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।