क्या वरुण गांधी उत्तर प्रदेश में भाजपा का नया चेहरा हैं? ये सवाल यूपी के राजनीतिक गलियारों में फिलहाल गूंज रहा है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा ने यूपी में बुजुर्ग नेताओं को किनारे कर आगामी लोकसभा चुनाव वरुण के नेतृत्व में लड़ने की तैयारी कर ली है।
गुरुवार को सुल्तानपुर की रैली में वरुण को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने के नारे लगे। हालांकि विधानसभा चुनाव अभी दूर है लेकिन लोकसभा चुनाव की तैयारी राजनीतिक दलों ने शुरु कर दी है।
यूपी में सपा और बसपा जैसे दलों ने कई लोकसभा सीटों में पर प्रत्याशियों की घोषणा भी कर दी है। ऐसे में भाजपा की नई टीम पर सभी की निगाहें हैं।
भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव बनने के बाद वरुण गांधी ने यूपी की राजनीति में पिछले एक महीने में जैसी सक्रियता दिखाई है, उसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों की यही राय है कि पार्टी प्रदेश में अगला लोकसभा चुनाव वरुण के नेतृत्व में ही लड़ेगी।
पार्टी ने इसी को ध्यान में रखकर यूपी में वरुण गांधी की आठ रैलियां प्रस्तावित कर रखी हैं। इनमें से दो रैलियां बरेली और सुल्तानपुर में हो चुकी हैं।
वरिष्ठ पत्रकार रत्न मणि लाल के मुताबिक, इन रैलियों के जरिए भाजपा यूपी में वरुण गांधी की फायरब्रांड युवा नेता की छवि को भुनाना चाहती है।
पार्टी को मध्यवर्ग में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए प्रदेश में नरेंद्र मोदी की शैली जैसे ही किसी फायरब्रांड लीडर की जरुरत, जो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की विचारधारा को भी आगे बढ़ा सके और युवाओं को भी लुभा सके।
इस लिहाज से देखें तो भाजपा आलाकमान को वरुण गांधी एक कम्प्लीट पैकेज दिखते हैं। कम उम्र, गांधी परिवार की पृष्ठभूमि और हिंदुत्व की पुरजोर वकालत।
यही वजह है कि अब ये माना जाने लगा है कि भाजपा यूपी में अगला लोकसभा चुनाव वरुण के नेतृत्व में ही लड़ेगी, हालांकि भाजपा नेतृत्व इस बात को स्वीकार नहीं करता।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय सोनकर 'शास्त्री' के मुताबिक, पार्टी में इस मुद्दे पर अब तक कोई विचार नहीं हुआ है। हालांकि प्रदेश में वरुण पार्टी का युवा चेहरा हैं।
औपचारिक घोषणा नहीं
भाजपा ने औपचारिक रूप से वरुण गांधी को यूपी चुनावों की कमान नहीं सौंपी है, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं में वरुण गांधी की लोकप्रियता बढ़ी है।
शनिवार को यूपी के दौरे पर जा रहे पार्टी महासचिव अनंत कुमार को यूपी में वरुण गांधी के प्रभावों का आकलन करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बताया जा रहा है कि पार्टी यूपी चुनावों की रणनीति इसके बाद ही तय करेगी।