उत्तराखंड में तबाही को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने से सरकार ने फिलहाल इंकार कर दिया है। कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार ने कहा है कि उसका फोकस अभी किसी नाम पर नहीं बल्कि राहत और बचाव पर है।
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सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने तर्क दिया है कि यह समय राष्ट्रीय आपदा की परिभाषा पर बहस करने का नहीं है बल्कि जरूरत है लोगों तक सहायता पहुंचाने की और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने की।
वहीं सरकारी लापरवाही और मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद एहतियात कदम नहीं उठाने के आरोपों पर सरकार ने कहा है कि अभी समय राहत और बचाव का काम करने का है। अगर कोई खामी या लापरवाही है, तो इस बाद में देखा जाएगा।
तिवारी ने कहा कि किसी त्रासदी को नाम देने या न देने पर वक्त खर्च करने के बजाय हम राहत कार्य पर ध्यान दे रहे हैं। हमारी चिंता मुश्किल में फंसे लोग हैं।
वहीं सवाल उठ रहा है कि मौसम विभाग ने 15 जून को चेतावनी जारी की थी मगर उस पर ध्यान नहीं दिया गया। इस मसले पर सरकार का कहना है कि इस समय सरकार कोई विश्लेषण नहीं करेगी।
अगर कोई लापरवाही की बात सामने आती है तो उस पर गौर किया जाएगा। वहीं उत्तराखंड में फंसे लोगों का डाटाबेस बनाने के मसले पर तिवारी का कहना है कि उत्तराखंड ऐसा डाटाबेस बनाने की कोशिश कर रहा है।
ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, जहां लोग रिपोर्ट कर सकें और जहां से बचाव कर्मी भी जानकारी हासिल कर सकें।