प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कैबिनेट की बैठक के बाद कहा कि नए मंत्रियों को अहम जिम्मेदारी दी जानी चाहिए, जिससे उनकी क्षमता का अधिक से अधिक इस्तेमाल हो। उन्होंने कहा कि सियासी चुनौतियों के बीच देश का विकास करना है, इसलिए नए मंत्रियों से उम्मीदें भी हैं।
हमलों से ना डरें
मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद कैबिनेट की नई टीम से मिलते हुए बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री ने कहा कि आप दोगुनी ताकत से चुनौतियों से निपटें। बैठक में मनमोहन ने सरकार की 9 साल की उपलब्धियां भी गिनाईं। पीएम ने कहा कि विपक्ष के हमलों से डरने की जरूरत नहीं है। यह समय बुनियादी ढांचे में सुधार करने का है।
वित्तीय घाटा बढ़ा
पीएम ने मंत्रिपरिषद से कहा कि विश्व में जारी मुश्किल आर्थिक हालात का असर भारत पर भी पड़ा है। हमारा राजकोषीय घाटा बहुत ज्यादा है और घरेलू तथा विदेशी निवेश के लिए यह एक प्रतिरोधक की तरह काम करता है। उन्होंने कहा कि इसके चलते हमारी आर्थिक वृद्धि की गति धीमी पड़ी है, निर्यात में गिरावट आई है और हमारा वित्तीय घाटा बढ़ गया है।
ना दें विवादित बयान
प्रधानमंत्री ने तमाम मंत्रियों से हर तीन माह में अपने काम की समीक्षा करने के लिए कहा है। इसके अलावा उन्होंने मंत्रियों से उनके प्रमुख पांच एजेंडे सौंपने के लिए कहा है। पीएम ने मंत्रियों को विवादित बयान ना देने और आपसी टकराव से बचने की सलाह भी दी है।
बैठक काफी अहम
यूपीए-2 में पहली बार प्रधानमंत्री ने पूरे मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई। कांग्रेस के मिशन 2014 को देखते यह बैठक काफी अहम है। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी सरकार की छवि सुधारने के साथ ही आर्थिक सुधारों को तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ाना था।
मालूम हो कि पिछले रविवार को व्यापक तौर पर मंत्रिपरिषद में फेरबदल कर 17 नए चेहरे शामिल किए थे। साथ ही कई मंत्रियों के विभागों में भी बदलाव किया गया था। विशेषकर युवा मंत्रियों को प्रोन्नति दी गई और कई के विभाग भी बदले गए।