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पलटी केंद्र सरकार, नहीं कराएगी महिला जासूसी कांड की जांच

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खासी किरकिरी के बाद यूपीए सरकार ने गुजरात के महिला जासूसी कांड की जांच से हाथ खींच लिया है।
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16 मई तक जांच आयोग के औपचारिक गठन पर अड़ी सरकार ने सोमवार दोपहर गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात के बाद अचानक यू-टर्न ले लिया।

गृह मंत्रालय में सुबह से चल रही मैराथन बैठक के बाद फैसला किया गया कि आयोग का गठन और उसकी अध्यक्षता के लिए जज की नियुक्ति अगली सरकार करेगी।

राष्ट्रप‌त‌ि ने दी दूर रहने की सलाह

उच्चपदस्थ सरकारी सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति ने सरकार को अपने शासन के आखिरी दिनों में इस संवेदनशील मुद्दे से दूर रहने की सलाह दी है।

मालूम हो कि यूपीए के घटक दलों एनसीपी और नेशनल कांफ्रेंस ने भी जांच के फैसले के वक्त को लेकर विरोध जाहिर किया था, जबकि भाजपा ने भी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी।

मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि रविवार की रात आयोग की अध्यक्षता के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर हो चुके जज अचल बिहारी श्रीवास्तव ने अपनी स्वीकृति भी भेज दी थी।
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जांच के ल‌िए कोई जज नहीं था तैयार

इससे पहले कथित तौर पर नरेंद्र मोदी और अमित शाह को घेरे में लेने वाली इस संवेदनशील जांच के लिए कोई जज तैयार नहीं हो रहे थे।

गृह मंत्रालय के उच्चपदस्थ अधिकारी ने अमर उजाला को बताया कि बड़ी मुश्किल और मशक्कत से जज की खोज पूरी हुई तो सरकार ने ही जांच से हाथ खींच लिया।

जज को मनाने में गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा विभाग और उसके एक वरिष्ठ अधिकारी का अहम रोल माना जा रहा है।
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