वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने भरोसा जताया है कि यूपीए सरकार से डीएमके के समर्थन वापसी के बाद भी केंद्र सरकार को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब भी बहुमत है।
संसद परिसर में चिदंबरम ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि संसद में श्रीलंकाई तमिलों के बारे में प्रस्ताव लाने के डीएमके की मांग पर विचार कर रही है।
उन्होंने बताया कि संसद में लाया जाने वाला प्रस्ताव कैसा होगा, इस बारे में राजनीतिक दलों से बातचीत की जा रही है।
चिदंबरम ने बताया कि कांगेस की संसदीय बोर्ड की बैठक में इस पर चर्चा हुई है। कोर कमेटी की बैठक में भी इस मसले पर विचार किया गया है। जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा।
गौरतलब है कि डीएमके संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में श्रीलंकाई तमिलों के मामले में अमेरिका समर्थित प्रस्ताव पर श्रीलंका के खिलाफ मतदान करने की मांग कर रही है।
डीएमके प्रस्ताव में भारत सरकार की ओर से संशोधन कराने की मांग भी कर रही है। डीएमके का कहना है कि सरकार को अमेरिकी प्रस्ताव की भाषा पर संशोधन कराने के लिए 'एमेंडमेंट' पेश करना चाहिए। साथ ही डीएमके की मांग है कि केंद्र इस मसले पर संसद में भी प्रस्ताव लाए।
सोमवार को इन मुद्दों पर बातचीत के लिए चेन्नई में तीन कैबिनेट मंत्रियों एके एंटनी, पी चिदंबरम और गुलाम नबी आजाद ने करुणानिधि से मुलाकात भी की थी।
वहीं यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी ने डीएमके द्वारा समर्थन वापसी के मुद्दे पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। हालांकि समर्थन वापसी से पहले हुई कांग्रेस संसदीय बोर्ड की बैठक में उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार श्रीलंकाई तमिलों के मानवाधिकार के साथ है।