सुन्नी संप्रदाय के प्रमुख नेता और मुस्लिम विद्वान शेख औसेदुल हक कादरी की इराक की राजधानी बगदाद में आंतकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
वे उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के निवासी थे और इराक में नायब काजी थे।
इराक अमेरिकी हमले के बाद से ही आतंकवाद से पीड़ित है। आतंकियों ने विदेशी नागरिकों और संयुक्त राष्ट्र के सहायताकर्मियों को निशाना बनाकर वहां पहले भी कई हमले किए हैं। लेकिन शायद ये पहली बार है कि इराक में किसी भारतीय नागरिक को आतंकियों को निशाना बनाया है।
कादरी की कार को बनाया निशाना
आंतकियों ने कादरी की कार को निशाना बनाकर हमला किया। हमले में कदरी के पिता और छोटे भाई बाल-बाल बच गए।
कादरी इराक में नायब कादरी के बतौर काम कर रहे थे। सुन्नी नेता होने के बाद भी अन्य धार्मिक समूहों के साथ उनके संबध सद्भावपूर्ण थे।
दुनिया भर में कादरी समुदाय के बीच 38 वर्षीय शेख औसेदुल हक कादरी बहुत लोकप्रिय थे। उनके अनुयायियों की संख्या भी कम न थी।
उनके पिता हजरत शालिमुल कादरी बदायूं में जामा मस्जिद के इमाम हैं। फिलहाल वे बगदाद की प्रसिद्व मजार 'बादा-पीर' के संरक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं।
मध्य-पूर्व में थे एक जानामाना नाम
कादरी और उनके पिता, दोनों ही मध्य पूर्व को एक जानामाना नाम हैं। परिवार के एक करीबी व्यक्ति ने बताया कि कि मध्यपूर्व देशों में उनका कई सालों से आनाजाना था। वहां उनके कई मित्र भी हैं।
कादरी, उनके पिता और छोटे भाई मंगलवार को ही मिस्त्र की राजधानी कहिरा से बगदाद पहुंचे थे।