इसे दारोगा की वीआईपी बनने की चाहत का नतीजा कहें या अस्पताल कर्मचारी की लापरवाही, लेकिन दारोगा को बिना कुत्ता काटे ही एंटी रैबीज इंजेक्शन लगा दिया गया।इसकी जानकारी होने के बाद दारोगा और साथ में आए चार सिपाहियों ने जमकर हंगामा किया।
जिससे एक घंटे तक अफरा-तफरी का माहौल रहा। इसके बाद डॉ. वीके सुमन ने दारोगा की तसल्ली के लिए ईसीजी भी करवाया। वाकया सोमवार दोपहर करीब डेढ़ बजे का है।
पुलिस लाइंस में तैनात दारोगा नियाज अहमद पैरों में दर्द की शिकायत लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। साथ में खुद को सिपाही बताने वाले चार युवक भी थे। दारोगा सीधे सीएमओ के चेंबर में पहुंचे और मर्ज बताया। सीएमओ ने उन्हें ओपीडी में जाने की सलाह दी।
लड़ झगड़ कर पहुंचे इंजेक्शन कक्ष में
दारोगा ने पर्ची बनवाई और ओपीडी में हड्डी के डॉक्टर के पास पहुंचे, डॉक्टर ने उनकी समस्या सुनकर एक इंजेक्शन और कुछ दवाएं लिख दीं। दारोगा दवाओं को लेने के लिए दवा काउंटर पर ना जाकर सीधे स्टोर में चले गए।
वहां दवा देने का नियम नहीं होने से अस्पताल कर्मचारियों से उनकी तू-तू मैं-मैं भी हुई। इसके बाद भी दारोगा की वीआईपी बनने की चाहत खत्म नहीं हुई। उन्होंने लड़ झगड़ कर दवा ली और पहुंच गए इंजेक्शन कक्ष में, जहां पर एंटी रैबीज इंजेक्शन लगाए जा रहे थे।
फार्मासिस्ट एक व्यक्ति को बेंच पर बैठाकर इंजेक्शन सिरिंज में भर रहा था कि दारोगा उस व्यक्ति को उठाकर खुद बेंच पर बैठ गए। फार्मासिस्ट ने भी पीछे हुई मरीजों की तब्दीली नहीं देखी और मुड़ते ही सामने बैठे व्यक्ति को इंजेक्शन लगा दिया।
बिना पर्ची देखे लगा इंजेक्शन
जब बिना पर्ची देखे इंजेक्शन लग गया तो दारोगा को कुछ गलत होने का अहसास हुआ। पूछने पर फार्मासिस्ट ने बताया कि अभी आपकी ही तो पर्ची ली है। तब दारोगा ने बताया मैं तो अभी आया हूं, पर्ची मेरे पास है।
इस दौरान जिसको इंजेक्शन लगना था उसने बताया कि यह तो कुत्ता काटने का इंजेक्शन था तो दारोगा हक्के-बक्के रह गए, कुछ लम्हे बाद वह फार्मासिस्ट से उलझ गए। बताया जाता है कि उनके साथ आए लोगों ने हाथापाई भी की।
मामला पता चलने पर एसआईसी भी वहां पहुंच गए और डॉ. वीके सुमन को बुलाया गया। समझाने के बाद दारोगा की तसल्ली के लिए ईसीजी जांच भी कराई गई।
कोई लापरवाही नहीं हुई
इस मामले के संबंध में डॉ. एचआर यादव, एसआईसी, जिला अस्पताल ने कहा कि दारोगा चार लोगों के साथ आए थे। वह ओपीडी से सीधे स्टोर में गए और वहां से इंजेक्शन कक्ष में पहुंचे।
वहां पहले से बैठे व्यक्ति को उठाकर दारोगा खुद बैठ गए, जिसका सिरिंज में दवा भर रहे फार्मासिस्ट ने ध्यान नहीं दिया और उन्हें इंजेक्शन लगा दिया। इसमें कोई लापरवाही नहीं दिखती है, क्योंकि दारोगा बिना लाइन और बिना बताए ही वहां जबरदस्ती बैठ गए थे।