मेरठ में खरखौदा क्षेत्र की युवती से गैंगरेप और धर्मांतरण के मामले में पुलिस युवती के दावों को झुठलाने पर तुली है। रविवार को महिला थाने में होटल रंजीत के मैनेजर से पूछताछ की गई। मैनेजर ने पुलिस को कलीम की वह आईडी उपलब्ध कराई, जिसके आधार पर वह युवती के साथ तथाकथित रूप से होटल में ठहरा था। पुलिस ने होटल की तरफ से दी गई लिखित जानकारी और आईडी को विवेचना में शामिल कर लिया है।
थापर नगर स्थित होटल के मैनेजर सुरेश पंथी ने महिला थाने पर हुई पूछताछ में दावा किया कि गांव उलधन थाना खरखौदा निवासी कलीम पुत्र आदिल होटल में सात जून और 29 जून को ठहरा था। गवाही के रूप में मैनेजर ने कलीम की गांव उलधन की मुड़ी-तुड़ी वोटर लिस्ट संलग्न की है। इसमें कलीम की उम्र 27 वर्ष दर्ज है।
थाने पर स्वयं सत्यापित प्रार्थनापत्र देने के दौरान सुरेश ने दावा किया कि एक बार रुकने के दौरान कलीम ने युवती को अपनी पत्नी बताया। वहीं दूसरी बार दोस्त बताते हुए होटल में एंट्री ली थी।
कहां है रजिस्टर की छाया प्रति?
मैनेजर का दावा था कि पहली बार कलीम ने युवती का असली नाम दर्ज कराया था। दोनों बार कलीम ने खुद ही होटल के रजिस्टर में एंट्री की। अपना नाम और पता सही दर्ज किया था।
हालांकि, आईडी प्रूफ के साथ होटल के रजिस्टर के उन पन्नों की छाया प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसमें कलीम द्वारा होटल में रुकने के दौरान एंट्री करने की दावा किया गया।
इन सवालों पर साध ली चुप्पी: महिला थाने में मौजूद होटल मैनेजर से जब पूछा गया कि क्या वह कलीम या उस युवती को सामने आने पर पहचान सकता है, तो उसने इससे इनकार कर दिया। आईडी के साथ रजिस्टर में दर्ज एंट्री का प्रमाण क्यों नहीं दिया, इस पर भी मैनेजर चुप्पी साध गया।
ऐसे तो विपरीत जा रही विवेचना
23 जुलाई को अपहरण और 29 जून को गैंगरेप के युवती के दावे विवेचना में विपरीत जा रहे हैं। एसएसपी ओंकार सिंह पहले ही युवती के उन दावों का खंडन कर चुके हैं, जिसमें उसने कहा था कि उसका 23 जुलाई को अपहरण कर लिया गया था।
एसएसपी का दावा था कि युवती 23 जुलाई को दोपहर 12:30 बजे ऑपरेशन के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराई गई थी। वहां से वह 27 जुलाई की सुबह 10 बजे डिस्चार्ज हुई।
पुलिस अब यह दावा करने से भी नहीं चुकेगी कि 29 जून को युवती कलीम के साथ होटल रंजीत में ठहरी थी। हालांकि, जिस तरह से पुलिस के पास कलीम की आईडी पहुंची, रजिस्टर में एंट्री की छाया प्रति लेने में भी उसे कोई परेशानी नहीं होगी।
आरोपी करता था पुलिस में भर्ती कराने का दावा
खरखौदा प्रकरण में गिरफ्तार आरोपी कलीम युवती को पुलिस में भर्ती कराने का झांसा देता था। कहता था कि पुलिस अफसरों और कई राजनीतिक लोगों से उसकी अच्छी पहचान है। इसी के चलते उसकी युवती से बातचीत होती थी। यह बात रविवार को गैंगरेप और धर्म परिवर्तन की शिकार युवती के पिता ने बताई।
केस की छानबीन के दौरान पुलिस ने कलीम और युवती के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई। उसी में पता चला कि इनके बीच एक महीने के भीतर करीब 175 बार बातें हुईं। इस संबंध में युवती के पिता ने बताया कि उनकी बेटी उतर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल भर्ती की तैयारी कर रही थी। कलीम का गांव के मदरसे में भी आना-जाना था।
तभी उसने युवती से कहा था कि वह भर्ती के लिए फार्म भर दे और तैयारी शुरू कर दे। वह उसे भर्ती करा देगा। इसके बाद ही कलीम से युवती की फोन पर बात होती थी। कलीम से मुलाकात के बारे में युवती के पिता ने इनकार कर दिया।
युवती से बात करने पर लगाई रोक
शनिवार रात पीड़ित युवती गाजियाबाद स्थित यशोदा अस्पताल से छुट्टी लेकर अपने घर पहुंची। इसके बाद से युवती की किसी से बातचीत नहीं होनी दी गई।
रविवार को भी अमर उजाला टीम ने गांव पहुंचकर पीड़िता से बात करनी चाही। लेकिन उसके पिता ने साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि सवालों का जवाब देते-देते परेशान हो गए हैं। अब युवती को कुछ नहीं बताना। युवती को जो कहना है, वह कोर्ट में कहेगी।
पुलिस के खुलासे पर पिता का कहना है कि केस की दिशा मोड़ने के लिए पुलिस ऐसा कर रही है।