उत्तर प्रदेश पुलिस के अपने ही ठाठ हैं, चाहे जिले के कप्तान का आदेश हो या फिर प्रदेश की कमान संभालने वाले पुलिस महानिदेशक का। पुलिस को अफसरों के आदेशों का अता-पता ही नहीं है।
सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में कुछ ऐसा ही हुआ। आरटीआई के जवाब में बताया गया कि राज्य के गृह पुलिस अनुभाग को आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर शासन ने कोई आदेश नहीं जारी किया है।
जबकि मुख्यालय पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने कहा कि सुरक्षा संबंधी निर्देश राज्य के हरेक जोन, इकाईयों को जून में ही जारी किए जा चुके हैं।
यूपी के डीजीपी मुख्यालय ने अधिवक्ता गौरव अग्रवाल की आरटीआई के जवाब में सूचित किया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव की ओर से मार्च, 2011 में आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के संबंध में निर्देश जारी किए गए थे।
इन निर्देशों को समूचे राज्य में लागू करने का निर्देश 28 जून को जारी किया गया है। गौर करने वाला मसला यह भी है कि केंद्र की ओर से जारी किए गए निर्देशों को राज्य में दो साल के बाद लागू किया गया।
लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जिन्हें आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी है, उन्हें राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारी के निर्देशों का पता ही नहीं है।
यही वजह है कि गृह पुलिस अनुभाग ने 3 अक्तूबर को अपने जवाब में सूचित किया कि आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा के लिए प्रदेश शासन की ओर से कोई आदेश नहीं जारी किया गया।
जबकि इसी साल 14 जून को पुलिस महानिदेशक कार्यालय की ओर से कहा गया था कि आरटीआई कार्यकर्ताओं को सुरक्षा देने के मसले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक अपने-अपने जोन, इकाईयों से संबंधित कार्यवाही अपने स्तर पर करें।
डीजीपी कार्यालय ने जवाब में यह स्पष्ट किया है कि यह निर्देश सीबीसीआईडी, तकनीकी सेवाएं, विशेष जोन प्रकोष्ठ, जीआरपी, पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद समेत हरेक संबंधित कार्यालय को भेजे गए हैं।
लेकिन गृह पुलिस अनुभाग ने दो टूक में सुरक्षा देने संबंधी पूरे किस्से को खत्म करते हुए आरटीआई के जवाब में ऐसा कोई आदेश न मिलने की सूचना दी।
गौरतलब है कि कई आरटीआई कार्यकर्ताओं की गत वर्षों में हुई हत्याओं के सिलसिले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्रीय गृह मंत्रालय सभी राज्य सरकारों को ढाई साल पहले सुरक्षा मुहैया कराए जाने के संबंध में निर्देश दिए थे। लेकिन अब तक कई राज्य सरकारों ने इन निर्देशों को गंभीरता से लागू नहीं किया है।