उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में हाल में भड़के सांप्रदायिक दंगों में 46 मुसलिमों और 16 हिंदुओं को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इन दंगों से जुड़े आंकड़े पेश करने के दौरान यह जानकारी दी।
सांप्रदायिक हिंसा के बारे में सुप्रीम कोर्ट में अपनी विस्तृत रिपोर्ट पेश करते हुए यूपी सरकार ने कहा कि सांप्रदायिक दंगों में 11 हिंदू और 57 मुसलिम घायल हुए।
मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और सहारनपुर में दंगा भड़काने के आरोप में 615 हिंदुओं और 261 मुसलमानों को 128 मामलों में नामजद किया गया है।
चीफ जस्टिस पी.सदाशिवम की अगुवाई वाली बेंच ने याचिका दायर करने वालों की ओर से सरकार के खिलाफ पक्षपात की शिकायतों पर गौर करने के बाद कहा कि यह तकलीफदेह है। हमें इसका दुख भी है। मौतों को अलग करके नहीं देखा जा सकता। मौत, मौत है। और फिर अगर पक्षपात करने की शिकायत की जा रही है तो सरकार को इसका जवाब देना चाहिए।
यूपी सरकार की इस रिपोर्ट पर आपत्ति किए जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की।
बेंच ने यह भी साफ कर दिया कि अगर वह राज्य सरकार के अधिकारियों की जांच से संतुष्ट नहीं हुई तो सीबीआई जांच का आदेश देगी।
अपनी रिपोर्ट में यूपी सरकार ने कहा कि दंगों में बृहस्पतिवार तक 243 गिरफ्तारिया की गईं। गिरफ्तार लोगों में 183 हिंदू और 60 मुसलमान हैं।
आईपीसी की धारा 151 के तहत मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों से कुल 2614 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
दंगा पीड़ित लोगों की ओर से दायर 128 मामलों के विश्लेषण से पता चलता है कि दंगों में 615 हिंदुओं और 192 मुसलमानों को नामजद किया गया है।
दंगों की जांच के दौरान 192 और लोगों के नाम सामने आए। इस तरह पांच जिलों में दंगों से जुड़े 128 मामलों में 1068 लोगों को नामजद किया गया है।