भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश और बिहार को चुनावी लिहाज से बेहद अहम मान रहे हैं। इन दोनों राज्यों में पार्टी की चुनावी रणनीति पर वह खुद भी नजर रख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में मोदी के ही नेतृत्व में पूरे मुखर हिंदुत्व अभियान चलाया जाएगा लेकिन इस बात का भी ख्याल रखा जाएगा कि यह मुखर हिंदुत्व कहीं भी कट्टर न दिखाई पड़े।
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नवरात्र के बाद मोदी लखनऊ सहित राज्य के अलग-अलग हिस्सों में कुल नौ रैलियों को संबोधित करेंगे।
इसके अलावा चुनाव प्रचार के दौरान राज्य के हिंदुत्व के मुखर अपने नेताओं मसलन कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार और वरुण गांधी की ज्यादा से ज्यादा रैलियां कराने की व्यवस्था की जाएगी।
चूंकि राज्य की चुनाव तैयारियों पर बेहद महत्वपूर्ण चर्चा होनी थी, इसलिए भाजपा की मंगलवार को हुई बैठक में राज्य के सभी पूर्व अध्यक्षों के साथ ही डॉ. मुरली मनोहर जोशी, कलराज मिश्र, विनय कटियार और वरुण गांधी को भी बुलाया गया था।
वैसे भी चुनाव अभियान समिति की जिम्मेदारी संभालते ही मोदी ने उत्तर प्रदेश और बिहार के संदर्भ में खुद रणनीति तय करने का फैसला किया था। इन दोनों राज्यों में लोकसभा की 120 सीटें हैं।
मोदी का मानना है कि कम से कम 200 सीटों का लक्ष्य हासिल करने के लिए इन दो राज्यों में बिना शर्त बेहतर प्रदर्शन की जरूरत है।
यही कारण है कि मोदी जहां नवरात्र के बाद यूपी में नौ रैलियों को संबोधित करेंगे, वहीं पटना में अक्तूबर के अंत में हुंकार रैली को संबोधित कर बिहार में चुनावी तैयारी शुरू कर देंगे।
15 अक्तूबर तक सभी राज्यों के कोरग्रुप की बैठक
चुनावी तैयारियां शुरू करने के लिए राजनाथ 15 अक्तूबर तक सभी राज्य के कोरग्रुप की बैठक बुला लेना चाहते हैं। इन बैठकों में राज्य इकाई को उम्मीदवारों का जल्द से जल्द चयन का निर्देश दिया जाएगा।
पूर्वोत्तर के राज्यों के कोरग्रुप की बैठक गुवाहाटी में, उत्तर भारत के राज्यों के कोरग्रुप की बैठक 23-24 सितंबर को, दक्षिण के राज्यों की 26-27 अक्तूबर, पूर्वी राज्यों बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा की पटना में और उत्तराखंड की अलग से बैठक दिल्ली में होगी।