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मायावती को जोर का झटका, पार्टी में बगावत

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दलितों की हितैषी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) महाराष्ट्र में दो फाड़ हो गई है। पार्टी सुप्रीमो मायावती से असंतुष्ट राज्य के आधे से अधिक पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बसपा के संस्थापक सदस्य डॉ. सुरेश माने के नेतृत्व में बहुजन रिपब्लिकन सोशलिस्ट पार्टी (बीआरएसपी) नाम की एक नई पार्टी बना ली है। इससे महाराष्ट्र में बसपा को स्थापित करने की मायावती की कोशिशों को जोर का झटका लगा है।
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महाराष्ट्र में भले ही बसपा कभी लोकसभा या विधानसभा का चुनाव नहीं जीत पाई, लेकिन उसका एक एकमुश्त वोट बैंक रहा है। बीते विधानसभा चुनाव में बसपा को 2.3 फीसदी वोट मिले थे।

बसपा का सबसे ज्यादा जनाधार विदर्भ में था, लेकिन विदर्भ के  सभी 11 जिलों में बसपा इकाई के बड़े नेता और जिलाध्यक्ष पार्टी छोड़कर बीआरएसपी में चले गए हैं।
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असंतुष्ट नेताओं ने बनाई अलग पार्टी

इसके अलावा पुणे और ठाणे के बसपा जिलाध्यक्षों ने भी बगावत कर दी है। बीआरएसपी को बामसेफ का पूरा समर्थन है। कई मुस्लिम संगठन और अंबेडकर के आंदोलन से जुड़े संगठन भी नई पार्टी से जुड़ने लगे हैं।

विधानसभा चुनाव में नागपुर उत्तर सीट से सर्वाधिक मत पाने वाले पूर्व आईएएस किशोर गजभिए ने भी बसपा से नाता तोड़ लिया है।

गजभिए सहित बसपा के पूर्व अध्यक्ष सिद्धार्थ पाटिल, कुनवी समाज के नेता संजय गाडवे और प्रदेश बसपा सचिव अहमद कादर सहित कई बड़े पदाधिकारी बसपा छोड़ कर बीआरएसपी में आ गए हैं।

डॉ. माने ने बताया कि आगामी सितंबर महीने में मुंबई में पार्टी की रैली होगी। उसके बाद अक्टूबर में नागपुर में तीन दिवसीय अधिवेशन होगा, जिसमें पार्टी की रणनीति तैयार की जाएगी।

माने ने कहा, लक्ष्य से भटकी बसपा
डॉ. सुरेश माने बसपा के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। कई साल तक बसपा के राष्ट्रीय महासचिव और कई राज्यों के प्रभारी रह चुके डॉ. माने के प्रयास से तेलंगाना और तमिलनाडु में बसपा का खाता खुला था, लेकिन अब उनका पार्टी से मोहभंग हो गया है। वह कहते हैं कि जिसके लिए बसपा बनी, पार्टी उस लक्ष्य से भटक गई है। न बसपा की राजनीति सफल है और न ही मूवमेंट।

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