देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के छत्रपति शिवाजी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शनिवार को पांच मानवरहित पैराशूट देखे जाने से हड़कंप मच गया। पैराशूट कहां से आए और क्या इन्हें कोई रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित कर रहा था?
क्या एयरपोर्ट के आसपास की बस्तियों में से बच्चों ने चीन निर्मित पैराशूट उड़ाए और आखिरकार हवा के विपरीत दिशा में पैराशूट कैसे उड़ रहे थे, ये सारे सवाल सुरक्षा एजेंसियों के लिए अबूझ पहेली बने हुए हैं।
इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने सुरक्षा एजेंसियों से जवाब तलब किया है। इस घटना से वायुसेना, नौसेना, आईबी, सीएसआईएफ आदि सुरक्षा एजेंसियां सकते में आ गई हैं।
मामले की जांच शुरू कर दी गई है
शिवाजी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर यह वाकया उस समय हुआ, जब जेट एयरवेज का विमान टेक ऑफ करने वाला था। पैराशूट सिर्फ 150 मीटर की ऊंचाई पर थे। ऐसे में विमान इन पैराशूटों से टकरा सकता था।
जेट एयरवेज के पायलट दिनेश कुमार ने शाम करीब छह बजे इन पैराशूट को उड़ते हुए देखा था। इसके बाद विमान की उड़ान रोक दी गई थी। पैराशूट करीब छह मिनट तक हवा की विपरीत दिशा में उड़ते हुए टर्मिनल-2 की ओर गए।
इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये रिमोट से चलाए जा रहे थे। जब एयरपोर्ट अथॉरिटी को इसकी जानकारी मिली, तब जुहू पुलिस थाने से लेकर कुलाबा में तटीय एयर स्पेस पर नजर रखने वाले आईएनएस के कुंजाली से संपर्क किया गया।
पीएमओ ने मांगा जवाब
वहां से पता चला कि न तो वे कुछ उड़ा रहे हैं और न ही उनके रडार में कुछ ऐसा दिख रहा है। इस घटना के बाद सोमवार को सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने मुंबई में बैठक की।
इस बैठक में इस संबंध में सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया। हालांकि अभी तक एयरपोर्ट पर पैराशूट उड़ने के रहस्य से पर्दा नहीं उठ पाया है। राज्य गृह मंत्रालय के अपर मुख्य सचिव केपी बख्शी ने कहा कि मामले की जांच चल रही है।