उत्तर भारत के विभिन्न इलाकों में आंधी और ओलों के साथ हुई बारिश गेहूं, सरसों और चने की फसल के लिए नुकसानदेह है।
वैसे चारे वाली फसलों, गन्ना और पेड़ों को बेमौसम की इस बरसात से लाभ पहुंचेगा। बहरहाल, शुक्रवार को कुछ इलाकों में निकली धूप ने किसानों को बड़ी राहत दी है।
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अभी तक हुई बारिश इतनी ज्यादा नहीं है कि फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचे। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर गेहूं या सरसों की फसल गिर गई है तो जरूर नुकसान होगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में फसल विभाग संभाग के उप महानिदेशक डॉ. स्वपन कुमार दत्ता का कहना है कि यह बारिश इतनी ज्यादा नहीं है कि फसलों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचे।
बारिश के बाद निकली धूप फसलों के लिए अच्छी है। अभी कुछ दिन अच्छी धूप निकले तो गेहूं के लिए अच्छा है, वरना इसमें कालापन आ जाएगा।
नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी के अध्यक्ष डॉ. जेएस सामरा का कहना है कि इस आंधी और ओलों की वजह से गेहूं और सरसों की पकने को तैयार फसल गिर गई है। इससे कटाई में दिक्कत आएगी और कटाई के दौरान नुकसान भी ज्यादा होगा।
आगरा, हरियाणा, पंजाब में सरसों की फसलों को ऐसी बारिश से काफी नुकसान पहुंच सकता है। इनके अलावा इस समय भिंडी, खीरा, लौकी और तोरी जैसी सब्जियों पर भी ओलों की मार पड़ेगी।
गन्ना, चारा और पेड़ों को फायदा
डॉ. सामरा का कहना है कि ताजा हल्की बारिश बरसीम जैसे चारे, गन्ना और पेड़ों के लिए काफी अच्छी है। बारिश के बाद की धूप में पत्तों का फूटाव बढ़िया होता है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा में गन्ना, चावल और गेहूं की खेती के बजाय किसानों में प्लांटेशन का चलन बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण हो चुका है।
गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन की उम्मीद
कई क्षेत्रों में बारिश के बावजूद इस साल देश में गेहूं का रिकॉर्ड 9.6 करोड़ टन उत्पादन हो सकता है। वर्ष 2013-14 के रबी सीजन में केंद्र सरकार 4.4 करोड़ टन गेहूं की खरीद की उम्मीद कर रही है, जो गत वर्ष से करीब 15 फीसदी ज्यादा है।
-इतनी बारिश से फसलों को बहुत नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। वैसे जिन इलाकों में बारिश से गेहूं बिछ गया है, वहां कुछ हद तक नुकसान जरूर होगा।
-इंदु शर्मा, प्रोजेक्ट डायरेक्टर (गेहूं अनुसंधान निदेशालय, करनाल)