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'राजीव के हत्यारे को अब फांसी देना संवैधानिक गलती'

Sun, 24 Feb 2013 11:39 PM IST
तिरुवनंतपुरम/एजेंसी
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पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी हत्याकांड के तीन दोषियों को 13 साल पहले फांसी की सजा सुनाने वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के मुखिया रहे पूर्व जज केटी थामस ने रविवार को कहा कि 22 साल तक जेल में रखने के बाद इस मामले में बिना रिव्यू किए इनको फांसी देना संवैधानिक रूप से अनुचित होगा।
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थामस ने कहा कि हमने राजीव गांधी हत्याकांड में फांसी की सजा पाए आरोपियों के स्वभाव व चरित्र पर विचार नहीं किया इसलिए इनको फांसी की सजा देना संविधान के अनुच्छेद 22 के विपरीत है। इतनी देर से इन्हें फांसी पर लटकाना संवैधानिक रूप से उचित नहीं होगा।

2010 में जस्टिस एसबी सिन्हा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने बारियार केस में इस बात पर गौर किया, फांसी पाने वाले अपराधी का चरित्र पर अवश्य विचार किया जाना चाहिए। राजीव हत्याकांड के तीन दोषी मुरुगन, सांथन व पेरारिवालान दो दशक से ज्यादा समय से जेल में हैं।
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आजीवन कारावास पाने वाले कैदी को केस पर पुनर्विचार कराने का अधिकार होता है, चाहे उस पर छूट मिले या नहीं। इन तीनों गुनाहगारों को केस के रिव्यू का मौका दिए बिना लंबे समय तक जेल में रखा गया है।  

ज्ञातव्य है कि राजीव गांधी की हत्या तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई, 1991 को कर दी गई थी। इस मामले की सुनवाई के लिए गठित अदालत ने 1998 में 26 लोगों को फांसी की सजा सुनाई थी पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इनमें से सिर्फ चार को यह सजा बरकरार रखी।

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की अपील पर इनमें से एक नलिनी की फांसी की सजा को वर्ष 2000 में आजीवन कारावास में बदल दिया गया था। शेष तीनों की दया याचिका को 2011 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने खारिज कर दिया था।
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