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यूएन पोल के अगले ही दिन मिली कसाब को फांसी

Thu, 22 Nov 2012 08:48 AM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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भारत सहित 39 देशों ने मौत की सजा पर प्रतिबंध के संबंध में संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश किए गए प्रस्ताव के मसौदे का विरोध किया और कहा कि प्रत्येक राष्ट्र को अपनी कानून व्यवस्था तय करने का अधिकार है। प्रस्ताव के पक्ष में रिकार्ड 110 देशों ने मतदान किया। इस अबाध्यकारी प्रस्ताव में फांसी पर रोक की बात कही गई थी ताकि सजा-ए-मौत को समाप्त किया जा सके।
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भारत भी उन देशों की सूची में था जो सजा-ए-मौत के पक्ष में थे। मतदान के अगले ही दिन सुबह कसाब को फांसी दे दी गई। वैसे इस मतदान पर कई पुराने सहयोगी राष्ट्रों की अलग-अलग राय सामने आई। अमेरिका, जापान, चीन, पाकिस्तान, कोरिया, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया और भारत समेत 39 देशों ने इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया।

110 सदस्यों ने इसका समर्थन किया, जबकि 36 देशों ने कोई राय जाहिर नहीं की। इस प्रस्ताव के पक्ष में जबरदस्त अभियान चलाने वाले राष्ट्र नॉर्वे ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया कि इतना भारी समर्थन एक ‘महान परिणाम’ है।
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दो साल पहले 2010 में भी इस प्रस्ताव पर मतदान हुआ था, जिसमें 107 देशों ने मौत की सजा पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में मतदान किया था।  

दूसरे देशों में सजा-ए-मौत
-58 देश मृत्युदंड देने के मामले में काफी सक्रिय।
-97 देश इस सजा के प्रावधान को समाप्त कर चुके हैं।
-बाकी बचे देशों में पिछले लगभग 10 सालों से मृत्युदंड नहीं दिया गया।
-73 देशों में इस सजा को लागू करने के लिए गोली मारी जाती है।
-इनमें से 45 देशों में फायरिंग स्कॉड मौत की सजा को लागू करने का एकमात्र तरीका है।
-भारत सहित 33 देशों में फांसी मृत्युदंड का एकमात्र तरीका है।
-छह देशों में स्टोनिंग यानी पत्थर मार कर यह दंड दिया जाता है जबकि पांच देशों में इंजेक्शन देकर यह सजा दी जाती है।
-तीन देशों में सिर कलम कर इस सजा को अंजाम दिया जाता है।
-चीन में इंजेक्शन और फायरिंग के जरिए मृत्युदंड की सजा दी जाती है।
-अफगानिस्तान और सूडान में फांसी के अलावा फायरिंग और पथराव के जरिए भी ऐसी सजा दी जाती है।
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