चुनावी महासमर का अंतिम दौर शुरू होने में अब कुछ ही वक्त बचा है। ऐसे में नेताओं को सोझ-समझकर बयान देने चाहिए। लेकिन इन दिनों माहौल कुछ अलग है।
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राजनीतिक मैदान में एक-दूजे को पटखनी देने के लिए हमारे नेताजी अपने समर्थकों के बीच पहुंचकर विरोधियों के लिए ऐसे-ऐसे शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें तमीज और तहजीब जरा नजर नहीं आती।
लेकिन यह मामला कुछ अलग है। इसमें पार्टी की नेता ने अपने बुजुर्ग नेता की तारीफ के चक्कर में पीएम पद के मौजूदा दावेदार के बारे में कुछ ऐसा कह दिया कि विरोधियों के हाथ आलोचना करने का मौका लग गया। हम भाजपा की बात कर रहे हैं।
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उमा भारती ने मोदी पर की टिप्पणी
भाजपा की फायरब्रांड नेता उमा भारती ने सोमवार को अपनी पार्टी के पीएम पद के दावेदार नरेंद्र मोदी और पार्टी के सबसे लोकप्रिय नेता अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण देने की कला का जिक्र किया और मोदी के लिए नई मुसीबत खड़ी हो गई।
उत्तर प्रदेश के झांसी में चुनाव प्रचार करते वक्त उन्होंने कहा, "वाजपेयीजी गजब का भाषण देते थे। लोगों का कहना है कि भारतीय राजनीति में उनकी तरह भाषण देने वाला दूसरा नेता नहीं हुआ।"
उमा भारती ने कहा, "अगर आप ध्यान देंगे, तो पता लग जाएगा कि मोदी भाषण देने के मामले में इतने सिद्धहस्त नहीं हैं। लोग उनकी रैलियों में इसलिए नहीं जाते क्योंकि वो अच्छा बोलते हैं, बल्कि इसलिए जाते हैं कि क्योंकि वो चाहते हैं कि मोदी उनका देश बदले और वो उनके साथ खड़े हैं।"
वाजपेयी की विरासत संभालना चाहते हैं मोदी
उमा भारती उत्तर प्रदेश के झांसी से लोकसभा चुनाव लड़ रही हैं। पहले कहा जा रहा था कि उन्हें रायबरेली से सोनिया गांधी के खिलाफ उतारा जा सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। भाजपा ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ स्मति ईरानी को उतारा है।
अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा के इकलौते नेता हैं, जो प्रधानमंत्री का पद संभाल चुके हैं। मोदी उसी कुर्सी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। मोदी इन दिनों अपनी रैलियों में जुटने वाली भीड़ का जिक्र कर रहे हैं। और उनके बोलने के अंदाज पर भी काफी कुछ कहा जा चुका है।
लेकिन उमा भारती का यह बयान भाजपा के लिए नया बखेड़ा कर सकता है। मोदी उम्मीद कर रहे हैं कि वो इतिहास बदलें और वाजपेयी के बाद पार्टी के दूसरे ऐसे नेता बनें, जो पीएम की कुर्सी तक पहुंचें। लेकिन यह इतना आसान नहीं है।
उमा भारती को कर दिया गया था बाहर
चुनावी सर्वे कह रहे हैं कि भाजपा की अगुवाई वाला एनडीए इन चुनावों में बढ़िया प्रदर्शन करेगा। अपने भाषणों में नरेंद्र मोदी बार-बार अटल बिहारी वाजपेयी का जिक्र करते हैं और अब पोस्टरों पर भी दोनों नजर आने लगे हैं।
छह साल तक 20 दलों की गठबंधन सरकार चलाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी की भाषण कला जोरदार मानी जाती है। खुद को संन्यासिन कहने वालीं उमा भारती उनकी सरकार में मंत्री रही थीं।
हालांकि, उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत 2005 में भाजपा से बाहर कर दिया गया था और उन्होंने अपनी अलग पार्टी बना ली। लेकिन साल 2011 में वो दोबारा भगवा दल में आ गईं।
उमा भारती का नरेंद्र मोदी की भाषण कला पर दिया यह बयान विरोधी दलों ने लपक लिया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और लखनऊ से राजनाथ सिंह से चुनावी मुकाबला कर रहीं रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि मोदी रैलियों में बोलते वक्त खुद पर संयम नहीं रख पाते। कोई लगाम नहीं हैं।
जेडीयू से खफा और इन दिनों आम आदमी पार्टी का बखान कर रहे शिवानंद तिवारी ने कहा कि मोदी की तुलना वाजपेयी से करना सूरज को दीपक दिखाने जैसा है।
इस बीच उमा भारती अपने बयान पर कायम हैं। उनसे जब पूछा गया कि इस बारे में वो क्या कहना चाहती हैं, तो उन्होंने कहा, "मैंने जो कल कहा था, वही खबर दिखाइए। मैं उसी पर कायम हूं।"