मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पांच दशक से भी अधिक पुराने यूजीसी के कानून में व्यापक बदलाव किए जाने का फैसला लिया है।
यूजीसी एक्ट के वर्तमान प्रावधानों की समीक्षा तथा एक्ट में संशोधन पर सुझाव के लिए पूर्व उच्च शिक्षा सचिव आर.पी. अग्रवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है।
पिछले कुछ सालों में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हुए भारी विस्तार तथा ग्लोबलाइजेशन के चलते इस क्षेत्र के नियमन में नई-नई चुनौतियां आ रही है।
यद्यपि यूजीसी इसके लिए समय-समय पर नियमावली बनाकर रास्ता निकालने का प्रयास करती रही है लेकिन उसे लगातार न्यायालय में चुनौती भी मिल रही है।
अब मंत्रालय ने भविष्य में उच्च शिक्षा की दशा एवं दिशा को ध्यान में रखते हुए यूजीसी एक्ट में व्यापक बदलाव किए जाने का फैसला लिया है।
यूजीसी के सचिव अखिलेश गुप्ता के अनुसार आरपी अग्रवाल की अध्यक्षता में बनी कमेटी यूजीसी एक्ट 1956 के वर्तमान प्रावधानों का विस्तार से अध्ययन करेगी। कमेटी ने देश के प्रमुख शिक्षा एवं कानून के जानकारों से भी इस संबंध में सलाह एवं सुझाव मांगने का फैसला लिया है।
विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, प्रोफेसरों तथा विश्वविद्यालयों से जुडे़ अन्य लोगों से भी एक्ट में संशोधन के लिए यह कमेटी सुझाव लेगी। यूजीसी एक्ट के संबंध में भारत का कोई अन्य नागरिक भी अपने सुझाव सीधे यूजीसी कार्यालय में भेज सकता है।
एक्ट में संशोधन संबंधी सुझाव सीधे यूजीसी के संयुक्त सचिव केपी सिंह को भी भेजा जा सकता है। कमेटी सभी सुझावों के अध्ययन के बाद एक्ट में बदलाव संबंधी ड्राफ्ट केंद्र सरकार को भेजेगी।