पिछले साल बिजनौर में शरण लिए छह आतंकियों को उनके आकाओं ने वेस्ट यूपी को दहलाने की मकसद से भेजा था। एजाजुद्दीन मुजफ्फरनगर दंगे का बदला लेने के लिए अपने साथियों के साथ यहां पनाह ले रखा था।
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इन आतंकियों के निशाने पर मुजफ्फरनगर में लगने वाला आरएसएस का कैंप था। इस कैंप को उड़ाने के लिए ही बिजनौर में आतंकी बम बना रहे थे। यह बात आतंकियों ने जेल में बंद मददगार हुस्ना व अब्दुल्ला को ही बताई थी।
पिछले साल बिजनौर में लीलो देवी के मकान में आतंकी कई माह से टिके थे। किसी को उनके बारे में भनक तक नहीं था। यह आतंकी नाम बदलकर और हाथ में कलावा बांधने के साथ माथे पर तिलक भी लगाते थे। हिंदू इलाके में रहने वाले इन आतंकियों को सब हिंदू ही समझते थे।
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एजाजुद्दीन, महबूब और जाकिर हुसैन मोहल्ला जाटान में किराये पर एक मकान में रहता था, जबकिअसलम, सालिक और अकरम मोहल्ला भाटान में रहता था। भाटान के जिस मकान में आतंकी किराये पर रहते थे, उस मकान के नीचे के कमरे में हुस्ना अपनी बहन के साथ किराये पर रहती थी।
वेस्ट यूपी में खतरनाक मंसूबे अंजाम देने को छिपा था एजाजुद्दीन
हुस्ना आतंकियों से घुल मिल गई थी। रईस का पुत्र अब्दुल्ला भी आतंकियों के पास खूब आता जाता था। हुस्ना व अब्दुल्ला ने पकड़े जाने के बाद अफसरों को बताया था कि फरार आतंकियों के मंसूबे बेहद खतरनाक थे। इनके पास जाटान के मकान में छिपे आतंकी एजाजुद्दीन, महबूब व जाकिर भी आते थे। बाइकों से आतंकी घूमते थे।
इन आतंकियों ने हुस्ना व अब्दुल्ला के सामने कई बार मुजफ्फरनगर दंगे का बदला लेने का जिक्र किया था। मुजफ्फरनगर में जानसठ रोड पर एक कॉलेज में लगने वाले आरएसएस के शिविर को उड़ाने की आतंकी साजिश रच रहे थे। एजाजुद्दीन शिविर वाले स्थान की कई बार साथियों के साथ रेकी भी करके आया था।
इसलिए ही जाटान के मकान पर बम बनाया जा रहा था। एजाजुद्दीन ने मुजफ्फरनगर दंगे का बदला लेने के लिए बिजनौर में अपना ठिकाना बनाया था। हालांकि घर में बम विस्फोट होने के साथ ही आतंकियों का मंसूबा पूरा नहीं हो पाया था। आतंकियों के कमरे से मेरठ, मुरादाबाद, दिल्ली व मुजफ्फरनगर के टिकट भी बरामद हुए थे। ये आतंकी पाकिस्तानी प्रोडक्ट भी इस्तेमाल करते थे।
असलम से मिलने की ख्वाहिश रही अधूरी
जेल में बंद आतंकियों की मददगार हुस्ना की ख्वाहिश असलम के मुठभेड़ में मारे जाने से अधूरी रह गई। हुस्ना को उम्मीद थी कि एक न एक दिन असलम उससे मिलने जरूर आएगा। इसके लिए उसे चाहे कोई भी जोखिम क्यों न उठाना पड़े। हुस्ना असलम से बेहद घुल मिल गई थी।
उसके सारे राज जानती थी। असलम के साथ हुस्ना बेखौफ घूमती थी। कई बार असलम हुस्ना के साथ उसके गांव ऊमरी भी गया था। पुलिस की मानें तो शहर के सारे रास्ते असलम समेत सारे आतंकियों को हुस्ना ने ही दिखाए थे।
जेल जाते वक्त हुस्ना ने पुलिस से कहा था कि एक दिन असलम उससे मिलने जरूर आएगा। चाहे उसे इसके लिए कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। असलम के मुठभेड़ में मारे जाने से हुस्ना की असलम से मिलने की ख्वाहिश अधूरी रह गई।
तेलंगाना में छिपे रहे आतंकी
बिजनौर से फरार होने के बाद सभी आतंकी तेलंगाना राज्य में जा छिपे थे। आतंकियों ने तेलंगाना राज्य में एक बैंक से 42 लाख रुपये भी लूटे थे। तेलंगाना पुलिस बिजनौर में आतंकियों के पास से मिले नोटों का मिलान करने आई थी। वहां की पुलिस आतंकियों के बारे में जानकारी लेकर गई थी।
आतंकियों के संगठन सिमी ने तेलंगाना में जड़ें मजबूत कर रखी है। बिजनौर से फरार सभी आतंकी वहीं जा छिपे थे। सूत्रों की मानें तो बिजनौर में विस्फोट के बाद ही सभी साथियों ने तय कर लिया था कि अब उन्हें कहां जाकर छिपना है। इसके लिए तेलंगाना राज्य ही चुन लिया गया था।
बेहद खतरनाक था असलम मुठभेड़ में मारा गया असलम बेहद खतरनाक आतंकी था। कहीं भी गोली चलाने में वह माहिर था। साथियों में दिलेर समझा जाता था। बिजनौर में विस्फोट होने के बाद भी असलम को डर नहीं था। झालू का फुरकान भी उसका मददगार रहा है। आतंकी ने फुरकान को बाइक से लेकर बिजनौर आया और फिर लौटा।
काली मंदिर के पास बड़ी तादाद में पुलिस व पीएसी के जवान चेकिंग कर रहे थे। फुरकान ने असलम को फोर्स की चेकिंग के बारे में बताया, तो असलम ने साफ कह दिया था कि अगर उन्हें रोका तो कई जवानों को वह अकेला निपटा देगा। फुरकान की बातों पर यकीन किया जाए, तो असलम ने अपनी अंटी में माऊजर लगा रखा था। उसे कतई डर नहीं था कि वह पकड़ा जाएगा।
बिजनौर से फरार आतंकियों की तलाश में एनआईए के अलावा महाराष्ट्र, गुजरात समेत कई राज्यों की एसटीएफ के अलावा यूपी की एसटीएफ व एटीएस के साथ पुलिस लगी रही। सबको चकमा देकर ये आतंकी यूपी की सीमा से निकल गए थे। आतंकियों के फरार होने से पुलिस के साथ इन सबकी नाकामी उजागर हुई थी।
एसटीएफ व एटीएस ने आतंकियों की तलाश में दिल्ली, नोएडा, राजस्थान समेत कई राज्यों में छापे मारे, पर उन्हें सफलता नहीं मिली थी। एटीएस को तो कतई उम्मीद नहीं थी कि आतंकी तेलंगाना राज्य में छिपे हैं। सब मान रहे थे कि आतंकी दिल्ली व उसके आसपास के इलाके में छिपे हैं।