दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को 1996 के लाजपत नगर ब्लास्ट में कथित रूप से शामिल दो आतंकियों की फांसी की सजा को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। साथ ही कोर्ट ने तीसरे आतंकी की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया। चौथे आतंकी की उम्रकैद की सजा बरकरार है। अदालत ने जांच में गंभीर खामियों के लिए दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार भी लगाई है।
जस्टिस एस. रवींद्र भट की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने फांसी की सजा पाए मिर्जा निसार हुसैन व मोहम्मद अली भट उर्फ किले की सजा को रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया। साथ ही पीठ ने जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट के आतंकी मोहम्मद नौशाद की मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया।
चौथे आतंकी जावेद अहमद खान की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि जांच में बेहद ही सतही रुख अपनाया गया है। खंडपीठ ने कहा कि पुलिस ने शिनाख्त परेड नहीं करवाई और अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए। मामले की जांच में रोजनामचा एंट्री तक मौजूद नहीं थी।
जम्मू-कश्मीर इस्लामिक फ्रंट के आतंकियों ने 21 मई 1996 में लाजपत नगर सेंट्रल मार्केट में शक्तिशाली बम धमाके को अंजाम दिया था। आतंकियों ने चोरी की मारुति कार में विस्फोटक रखा था। धमाके में 13 लोग मारे गए थे और 38 अन्य घायल हुए थे।
गौरतलब है कि जिला अदालत ने 2010 में जेकेआईएफ के छह कथित आतंकियों में से मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद अली भट व मिर्जा नासिर हुसैन को मौत की सजा सुनाई थी। इनके चौथे साथी जावेद अहमद खान को उम्रकैद की सजा मिली थी। इसके अलावा मामले में एक अन्य आरोपी फारुक अहमद खान व उसकी महिला साथी फरीदा डार को एक्सप्लोसिव एक्ट में सात साल कैद और आर्म्स एक्ट में चार साल दो माह कैद की सजा सुनाई गई थी।