इजरायल फिलहार्मोनिक आर्केस्ट्रा के संचालक जुबिन मेहता के कार्यक्रम पर कश्मीर में सरकार और अलगाववादियों में टकराव की स्थिति बन गई है। जर्मन दूतावास की ओर से यह संगीत कार्यक्रम सात सितंबर को होने वाला है।
कार्यक्रम में बाधा के लिए अलगाववादी नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। दूसरी ओर, रियासती सरकार कार्यक्रम आयोजित करने पर अडिग है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि संगीत कश्मीर की संस्कृति का हिस्सा है। कार्यक्रम किसी भी सूरत में आयोजित होगा।
दरअसल, इस कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही अलगवावदियों ने विरोध शुरू कर दिया था और अब हुर्रियत के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी ने छह सितंबर को नमाज के बाद विरोध-प्रदर्शन का ऐलान किया है।
गिलानी ने सात सितंबर को बंद और हड़ताल की भी घोषणा की है। हालांकि हुर्रियत का जम्मू में कोई खास आधार नहीं है लेकिन वहां भी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया है।
सिविल सोसाइटी के कुछ लोगों ने सात सितंबर को ही हकीकते कश्मीर नामक कार्यक्रम का समानान्तर आयोजन किया है। जर्मन दूतावास ने कार्यक्रम के सिलसिले में तैयारियां पूरी कर ली हैं।
रियासती सरकार ने सुरक्षा के भी खास बंदोबस्त किए हैं। ऐतिहासिक मुगल गार्डन में प्रसिद्ध संगीतज्ञ जुबिन मेहता संगीत का जादू बिखेरेंगे और इसका यूरोप के तमाम देशों में लाइव प्रसारण होगा।
तहरीके हुर्रियत के चेयरमैन ने सोमवार को ऐलान किया कि ऐसे कार्यक्रम को वह कश्मीर में नहीं होने देंगे।