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टुंडाः 100 रुपए रिश्वत दी और बांग्लादेश में घुस गया

Tue, 17 Sep 2013 12:21 PM IST
पुरूषोत्तम वर्मा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में बम धमाकों को अंजाम देकर अब्दुल करीम उर्फ टुंडा 1994 में पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भाग गया था। बॉर्डर पर भारतीय जवानों ने टुंडा को उसके ससुर मो. जकारिया समेत पकड़ तो लिया लेकिन वे उसे पहचान नहीं पाए और पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया था।
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इसके बाद बॉर्डर पार करते ही बांग्लादेशी रेंजरों (बीडीआर) ने टुंडा को पकड़ लिया था। वहां टुंडा ने बांग्लादेशी रेंजरों को 100 रुपए की रिश्वत दी और बांग्लादेश में घुस गया था। बॉर्डर पर फायरिंग होने की वजह से टुंडा को कई दिन बॉर्डर पर स्थित गांवों में रहना पड़ा था।

स्पेशल सेल के अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल से ट्रांजिट रिमांड पर लाया गया मो. जकारिया टुंडा का ससुर है। हालांकि, उसकी उम्र टुंडा से बहुत कम है।

वर्ष 1994 में भागने के दौरान टुंडा पश्चिम बंगाल में गेट बड़ी मजिस्द के पास होटल में चार दिन और मटिया बुज में तीन दिन रहा था। यहां उसने बांग्ला भाषा सीखी थी। अगले दिन एक युवक ने मौरिस नगर (कोलकाता) पहुंचकर टुंडा को बताया कि बॉर्डर पर फायरिंग हो रही है, जिससे बॉर्डर पार करना संभव नहीं है। अगले दिन वे भातोरी और कालिदंग बॉर्डर के पास गए थे। यहां मजिस्द में उसकी बांग्लादेश के निवासी (उस समय पश्चिम बंगाल के भूलकी में रह रहा था) जकारिया से हुई।
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जकारिया उसे बॉर्डर पर स्थित निजामुद्दीन नामक व्यक्ति के गांव में ले गया। वहां से दोनों पैदल घूमते हुए बांग्लादेश भाग गए। बांग्लादेश में मो. जकारिया ने टुंडा को अपने ससुर अब्दुल मतीन से भी मिलवाया था।

जकारिया को 10 दिन की पुलिस रिमांड

अदालत ने आतंकी अब्दुल करीम टुंडा के सहयोगी मो. जकारिया को 10 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। जकारिया पर बांग्लादेश के रास्ते पाकिस्तानियों की भारत में घुसपैठ कराने का आरोप है। पुलिस उसे 26 सितंबर को अदालत में पेश करेगी। पुलिस ने जकारिया को कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल से लाकर पटियाला हाउस कोर्ट स्थित सीएमएम अमित बंसल के सामने पेश किया। सीएमएम कोर्ट ने प्रोडक्शन वारंट जारी किया
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