400 करोड़ रुपये के मछली पालन घोटाले में फंसे नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी की मुसीबतें बढ़ती दिख रही हैं।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने मत्स्य पालन मंत्री सोलंकी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है और वह छह महीने में अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेगी।
सोलंकी गांधीनगर से विधायक हैं और उन पर आरोप है कि 2009 में उन्होंने राज्य के 58 जलाशयों में अवैध रूप से फिशिंग की अनुमति दे दी थी।
नरेंद्र मोदी सरकार ने हालांकि सोलंकी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति नहीं दी थी, लेकिन गुजरात के गवर्नर डॉ कमला बेनीवाल ने इसे खारिज कर मुकदमा चलाने की अनुमति दी।
बाद में स्पेशल एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) कोर्ट में सोलंकी के खिलाफ भ्रष्टाचार रोधी अधिनियम की धारा 7, 8, 13(1)(डी), 31(ए), 31(बी) और 32 के तहत मामला दर्ज किया गया।
स्पेशल एसीबी कोर्ट के जज जीके उपाध्याय ने सोमवार को अपने आदेश में गांधीनगर के एसपी को निर्देश दिया कि वह जांच एसीबी को सौंप दें।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि एसीबी अपनी जांच 29 नवंबर, 2013 तक पूरी करे और विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे ताकि आगे की कार्रवाई शुरू की जा सके। कोर्ट ने यह आदेश इशाक मरादिया की शिकायत पर दिया है।
राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई से इंकार करने के बाद मरादिया ने गुजरात हाईकोर्ट की शरण ली थी, जिसने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह कैबिनेट स्तर पर इस बारे में फैसला ले।
हालांकि मरादिया को यहां से भी निराशा ही हाथ लगी। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्टेट कैबिनेट ने सोलंकी पर मुकदमा चलाने को मंजूरी नहीं दी।
हालांकि गुजरात गवर्नर ने पिछले साल 30 जुलाई को कैबिनेट के फैसले को खारिज कर सोलंकी के खिलाफ मामला चलाने की अनुमति दे दी।