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कोलकाता में ट्रांसजेंडर मना रहे नए तरीके से दुर्गा पूजा

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कोलकाता में दुर्गा पूजाओं में अक्सर अलग थीम का इस्तेमाल होता है लेकिन इस बार तो एक समूह ने सामाजिक जागरुकता का एक बिल्कुल अनोखा संदेश दिया है।
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ट्रांसजेंडर समुदाय जिनको कोई भी पूजा समुदाय अपने से जोड़ना नहीं चाहता है, उन्होंने खुद ही पूजा आयोजित करने का फैसला किया है और हां उनकी देवी भी बिल्कुल अलग है।

ट्रांसजेंडरों के बारे में माना जाता है कि उनमें पुरुष और स्त्री दोनों गुण होते हैं और ये ही भाव उन्होंने दुर्गा की मूर्ति में भी रखा है यानी कि दुर्गा की मूर्ति आधी दुर्गा है और आधे शिव।
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अर्धनारीश्वर मूर्ति की पूजा कर रहे ट्रांसजेंडर

जॉय मित्रा स्ट्रीट उद्यमी युवक संघ पिछले 27 सालों से पूजा आयोजित कर रहा है लेकिन इनका समूह बहुत छोटा है इस बार जब उन्होंने अर्धनारीश्वर मूर्ति बनाई तो सोशल मीडिया पर इस मूर्ति की तस्वीरें वायरल हो गईं।

इस पूजा के मुख्य आयोजकों में से एक आलोक गोस्वामी कहते हैं, ‘हमारे लिए ये कोई अनोखी चीज नहीं है। भानु नस्कर ट्रांसजेंडर हैं जो स्थानीय निवासी हैं और 26 साल से हमारे पूजा समुदाय से जुड़े हैं। हमें कभी नहीं लगा वो हमसे अलग हैं।’

इस साल भानु नस्कर ने ही प्रस्ताव दिया था कि मां दुर्गा की मूर्ति अर्धनारीश्वर की हो और ट्रांसजेंडर समुदाय को सीधे सीधे पूजा में इनवाल्व किया जाए।

वो कहते है, ‘‘मैं तो पूजा में शामिल होती थी लेकिन मेरे जैसे कई लोगों को पूजा पंडालों में जाने नहीं दिया जाता था। उन्हें लोग भगा देते थे। तो ये आइडिया आया कि क्यों न हम ही पूजा कर लें एक ऐसी। मैंने अपने इलाके के पूजा पंडाल से संपर्क किया और वो तैयार हो गए। उन्होंने हमें अर्धनारीश्वर मूर्ति बनाने की भी अनुमति दी। सामान्य मूर्ति के स्थान पर।’’
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हमें मान्यता देने की जरूरत

ट्रांसजेंडर समुदाय का मानना है कि ये दुनिया नर और नारी शक्ति से मिलकर बनी है सिर्फ नारी शक्ति से नहीं इसलिए नर और नारी दोनों की पूजा होनी चाहिए।

हालांकि इस कदम की आलोचना भी हो रही है। स्थानीय निवासी प्रमोद शॉ कहते हैं, ‘कई लोग आलोचना कर रहे हैं। इसमें ट्रांसजेंडर्स को इनवाल्व करने की क्या जरुरत थी। लेकिन हमने फैसला कर लिया है तो अब बदल नहीं रहे हैं।

सरकार ने इस समुदाय को मान लिया है तो हम क्यों न मानें। सब लोगों को उन्हें मान्यता देनी चाहिए।’
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