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भारत बंदः आज से 10 करोड़ कर्मचारी हड़ताल पर

Wed, 20 Feb 2013 08:35 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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देश में बुधवार से हो रही दो दिनी महा हड़ताल का जनजीवन पर व्यापक असर दिख सकता है। अपनी मांगों को लेकर 11 ट्रेड यूनियनों की ओर से बुलाई गई इस हड़ताल से कई राज्यों में परिवहन और बैंकिंग सेवाएं ठप रहने के आसार है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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हड़ताल से अर्थव्यवस्था को करीब 20 हजार करोड़ रुपये के नुकसान का बड़ा झटका लगने की आशंका है जबकि बैंकों में 80 लाख चेकों के अटकने से करीब 50 हजार करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन प्रभावित हो सकता है।

इसके मद्देनजर सरकार के साथ अब उद्योग जगत ने भी हड़ताल को गैरजरूरी बताते हुए इसे वापस लेने की अपील की है। लेकिन सरकार और मजदूर संगठनों के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद 20 और 21 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल होना तय है।
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भाकपा नेता गुरुदास दास गुप्ता ने कहा कि रक्षा मंत्री एके एंटनी समेत मंत्री समूह के साथ हुई वार्ता में सरकार ने कोई ठोस पहल नहीं की, जिसके कारण ट्रेड यूनियनों को बंद का निर्णय लेना पड़ रहा है। दूसरी ओर भारतीय उद्योग परिसंघ के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने हड़ताल को अनावश्यक बताते हुए इससे बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान की आशंका जताई है।

उद्योग संगठन एसोचैम के मुताबिक दो दिन की हड़ताल से अर्थव्यवस्था को 15 से 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। एसोचैम के अध्यक्ष राजकुमार धूत का कहना है कि अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण हालात से गुजर रही है। ऐसे में हड़ताल जीडीपी पर बड़ा असर डालेगी।

उद्योग संगठन फिक्की का कहना है कि ट्रेड यूनियनों की चिंताओं का समाधान हड़ताल के जरिए नहीं हो सकता है। इस बीच सरकार ने बैंक कर्मचारियों से हड़ताल पर नहीं जाने की अपील की है।

10 करोड़ कामगार होंगे हड़ताल पर
माना जा रहा है कि 90 हजार बैंक शाखाओं के 10 लाख कर्मचारी हड़ताल में शामिल होंगे। जबकि 10 करोड़ कामगारों के इसमें शामिल होने की संभावना भी है।

20,000 करोड़ का लगेगा चूना
इस वित्त वर्ष की जीडीपी 95 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इस हिसाब से हर दिन के लिए जीडीपी 26,000 करोड़ रुपये होगी। इस दो दिनी हड़ताल से दो दिन की जीडीपी में 30-40 फीसदी तक का नुकसान होने की आशंका, इस तरह इन दो दिनों में 15 से 20 हजार करोड़ रुपये तक का लग सकता है चूना।

कहां हो सकता है ज्यादा असर
दिल्ली, उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक।

कौन सेवाएं रहेंगी प्रभावित
रेल और बस सेवा बाधित होने से यात्रियों को बड़ी दिक्कत हो सकती है। बंदरगाहों पर काम प्रभावित हो सकता है। बैंकों में चेक क्लीयरेंस समेत अन्य काम ठप रह सकते हैं। साथ ही वित्तीय बाजार में भी हड़ताल की चपेट में आ सकता है।

बैंक कर्मी न हों शामिल: सरकार
सरकार ने बैंक कर्मियों से हड़ताल में शामिल नहीं होने की अपील की है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बैंकों में लगातार बड़ी संख्या में रोजगार दिए जा रहे हैं। बैंक कर्मियों का पे स्केल भी अच्छा है। इसलिए बैंक कर्मियों के हड़ताल में शामिल होने का कोई कारण नहीं है।

क्या हैं मांगें
ट्रेड यूनियनों ने दस मांगें सरकार के समक्ष रखीं हैं, जिनमें से ज्यादातर मांगें महंगाई रोकने, रोजगार पैदा करने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश की प्रक्रिया रोकने, श्रम कानूनों के अमल से संबंधित हैं।

डीटीसी हड़ताल में शामिल नहीं
ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय हड़ताल के बीच डीटीसी आम लोगों को राहत देने के लिए तैयार है। डीटीसी प्रबंधन और डिम्ट्स ने लोगों की परेशानी कम करने के लिए अधिक से अधिक बसों को सड़कों पर उतारने का निर्देश दिया है। अफसरों, ड्राइवरों और कंडक्टरों को अलर्ट रहने का आदेश जारी कर दिया गया है। स्टाफ की छुट्टियां भी रद्द कर दी गई हैं।
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