प्रदूषणों की वजह से लगातार गर्म हो रही धरती को बचाने में अब थोड़ा ही वक्त रह गया है। अगर कार्बन उत्सर्जन की दर साल 2100 तक शून्य के स्तर पर नहीं लाया गया तो दुनिया को इसके खतरनाक नतीजे भुगतने होंगे।
यह कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट का, जिसे रविवार को कोपनहेगेन में एक सम्मेलन में पेश किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है अगर ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए उपाय नहीं किए गए तो धरती पर भीषण बारिश, सूखा या ग्लेशियरों के पिघलने और समुद्रों का स्तर बढ़ने जैसी खतरनाक घटनाएं सामने आएंगी।
कोपेनहेगेन में हो रहे पांच दिवसीय सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन पर अंतरसरकारी पैनल (आईपीसीसी) के प्रमुख राजेंद्र पचौरी ने देशों को चेताते हुए कहा, "अभी भले ही समय हो, मगर यह वक्त बेहद कम है।"
उन्होंने सतह के औसत तापमान को दो डिग्री तक सीमित रखने के संयुक्त राष्ट्र के लक्ष्य का हवाला देते हुए कहा कि अभी यह तापमान 0.85 डिग्री सेल्सियस है। इसलिए यह एक बेहतर अवसर है कि हम इस तापमान को इसी स्तर पर रोके रखें ताकि 2100 तक इसे शून्य के स्तर पर या इससे कम रखा जा सके।
इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून भी मौजूद थे। 2015 के आखिर में इस पर सभी सदस्य देशों की सहमति के लिए पेरिस में इस रिपोर्ट को पेश किया जाएगा।