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लेफ्टी होना कोई खामी नहीं: सुमित्रा महाजन

Thu, 14 Aug 2014 01:46 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, दिल्ली
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लेफ्टी होने में कुछ गलत नहीं है। लेफ्टी होने केकारण किसी के भी मन में हीनता की भावना न आए इस बात का ध्यान रखना होगा। ‘आई कैन डू’ का भाव मन में होना चाहिए, जिससे कोई भी सफलता की ऊंचाई को छू सकता है। यह सोचा जाना चाहिए कि सामान्य लोगों से आप अलग नहीं हैं।
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उन जैसे ही गुण आप में विद्यमान हैं। आगे बढ़ते रहो, भारत का झंडा अपने आप ऊंचा उठेगा।’ लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने ‘अमर उजाला लेफ्ट हैंडर्स विद्यार्थी सम्मान 2014’ के अवसर पर छात्रों को सम्मानित करते हुए ये बातें कहीं।

अमर उजाला ने बरेली स्थित इंनवर्टीज विश्वविद्यालय के सहयोग से दिल्ली के लोदी रोड स्थित सत्य साईं इंटरनेशनल सेंटर में इंटरनेशनल लेफ्ट हैंडर्स डे के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन, शिक्षाविद व वैज्ञानिक प्रोफेसर यशपाल, पब्लिक इंटरप्राइजेज बोर्ड के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी व इंनवर्टीज विवि के संस्थापक व कुलपति उमेश गौतम ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
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पहली बार आयोजित हुए इस तरह के कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व दिल्ली-एनसीआर के दसवीं व बारहवीं पास 200 लेफ्ट हैंडर्स छात्रों को सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम के लिए इन तीनों संस्करणों से लगभग दस हजार पंजीकरण कराए गए। जिसमें से मेरिट के आधार पर 200 छात्रों का चयन किया गया।

बाकी छात्रों को प्रोत्साहन स्वरूप प्रमाणपत्र प्रदान किए जाएंगे। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षाविद व वैज्ञानिक प्रो. यशपाल ने छात्रों को मूल मंत्र देते हुए कहा कि कुछ खास करने की कोशिश करें जिसके लिए जीवन में प्रश्न करना सीखें। उल्टा हाथ, सीधा हाथ इस बात को मन से निकाल दें। इसमें कुछ फर्क नहीं होता है।

इनवर्टीज विवि के संस्थापक व कुलपति डॉ. उमेश गौतम ने इस अवसर पर कहा कि लेफ्ट हैंड की भ्रांति मन में आए तो उसे तोड़ दीजिए। दिल से ठान कर किसी भी काम को कीजिए। उन्होंने मंच से घोषणा की है कि जो भी छात्र इस कार्यक्रम में पंजीकृत हुए हैं वो अगर उनके विवि में आगे की पढ़ाई करना चाहते हैं तो 25 फीसदी स्कॉलरशिप विवि से मिलेगी।

इस अवसर पर इनवर्टीज विवि के छात्रों ने लेफ्ट हैंडर्स को समर्पित एक लघु नाटक भी प्रस्तुत किया। लेफ्ट हैंड से काम करने वालों का सम्मान कराना अच्छा प्रयास है। लेफ्टी होने के कारण कभी कोई परेशानी नहीं हुई। घरवालों ने प्रोत्साहित ही किया। यहां आकर सम्मान पाना अपने आप में अनूठा है। -कार्तिक अरोड़ा (देहरादून)

अपने जैसे इतने छात्रों को एक मंच पर देखना अनूठा अनुभव है। यह सम्मान दूसरे सम्मानों से काफी अलग है। लिहाजा एक अलग आनंद की अनुभूति हुई। अपने-अपने क्षेत्रों की हस्तियों के अनुभवों को जानने का अवसर मिला जो जीवन भर स्मरणीय रहेगा। इल्मा नकवी (मुरादाबाद)
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