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लालकृष्ण आडवाणीः रथयात्रा से मिली राजनीतिक मंजिल

Mon, 10 Jun 2013 05:18 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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नरेंद्र मोदी को चुनाव समिति का अध्यक्ष बनाने से बिफरे लालकृष्ण आडवाणी ने अपना गुस्सा खुलकर जाहिर कर दिया है। पार्टी के तीन अहम पदों से इस्तीफा देते हुए उन्होंने साफ कर दिया कि वह इतनी आसानी से घुटने नहीं टेकने जा रहे। आइए गौर करें आडवाणी के राजनीतिक सफर परः
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1942 आरएसएस में शामिल।

1952 श्यामा प्रसाद मुखर्जी की अगुवाई वाले जन संघ का हिस्सा बने।

1975 जन संघ के अध्यक्ष बने।

1977 केंद्र में जनता पार्टी सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बने।

1979 दोहरी सदस्यता के मुद्दे पर इस्तीफा दिया।

1980 भाजपा को खड़ा करने में मदद दी।

1986 भाजपा अध्यक्ष बने। इसके बाद 1993 से 98 और 2004 से 06 के बीच फिर इस कुर्सी तक पहुंचे।

1990 अपनी छह यात्राओं में से पहली यात्रा पर निकले। उद्देश्य था बाबरी मस्जिद की जगह राम
मंदिर निर्माण की मांग उठाना।

1991-93 लोकसभा में विपक्ष के नेता बने। 2004-09 के बीच दोबारा यह भूमिका अदा की।

1996 13 दिन चली वाजपेयी सरकार में गृह मंत्री बने।

1998 दोबारा यह जिम्मा संभाला, इस बार 13 महीने के लिए।

1999 एनडीए सरकार में तीसरी बार गृह मंत्री बने। साथ ही उप प्रधानमंत्री का पद भी संभाला।

2013 भाजपा के संसदीय बोर्ड, चुनाव समिति और कार्यकारिणी से इस्तीफा।
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