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वो रेल मंत्री, जिन्होंने बदल दिया था रेलवे का चेहरा

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आजादी के बाद जिन रेल मंत्रियों ने रेलवे में यादगार काम करके भारतीय रेल का चेहरा बदलने की कोशिश की, उन्हें रेल बजट के दिन जरूर याद किया जाना चाहिए। इस कड़ी में कमलापति त्रिपाठी, मधु दंडवते, माधवराव सिंधिया और नीतीश कुमार के नाम सबसे ज्यादा उल्लेखनीय हैं।
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हालांकि एक नाम लालू प्रसाद यादव का भी है, जिन्होंने टर्न अराउंड जिसे कुछ लोग आंकड़ों की बाजीगरी भी कहते हैं, से रेलवे के घाटे को 15 हजार करोड़ रुपए के मुनाफे में बदलने का श्रेय लिया।

आधुनिकीकरण के जरिए रेलवे का कायापलट करने का काम माधव राव सिंधिया ने तब किया जब राजीव गांधी सरकार में उन्हें रेल मंत्रालय दिया गया। रेलवे में कंप्यूटरीकरण और आरक्षण प्रणाली बदलने, बेहतर आधुनिक सुविधाओं से युक्त तीव्रगामी शताब्दी गाड़ियां चलाने जैसे बड़े परिवर्तन सिंधिया ने ही किए।
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नीतीश कुमार ने बदला रेल का ढर्रा

जबकि रेलवे में ढांचागत विकास मसलन रेल लाईनों के विस्तार, गेज परिवर्तन, पुलों के निर्माण जैसे कई बुनियादी कामों पर नीतीश कुमार ने जोर दिया। वहीं जनता पार्टी के जमाने में रेल मंत्री बने मधु दंडवते ने रेल गाड़ियों में पहले, दूसरे, और तीसरे दर्जे का वर्गीकरण खत्म करके वातानुकूलित और गैर वातानुकूलित स्लीपर कोच की व्यवस्था शुरू की।

दंडवते ने हर रेल कोच यहां तक अनारक्षित सामान्य श्रेणी के डिब्बों में भी लकड़ी के स्लीपरों को रैक्सीन कुशन के स्लीपरों में बदला। प्लेटफार्म टिकट की अनिवार्यता खत्म की, लेकिन बाद में उसे फिर शुरू कर दिया गया।

दंडवते से पहले इंदिरा गांधी की सरकार में रेल मंत्री रहे कमलापति त्रिपाठी ने अपने कार्यकाल में रेलवे स्टेशनों की साज सज्जा, जरूरी सुविधाओं और उनके विस्तारीकरण की शुरुआत की।
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