पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ललित मोदी मामले में बुधवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने इसे भाई-भतीजावाद, अधिकारों के दुरुपयोग और नियमों की अवहेलना का मामला करार दिया है।
चिदंबरम ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय के अनुरोध पर 2011 में ललित मोदी का पासपोर्ट रद कर दिया गया था।
ईडी ने ललित मोदी को कारण बताओ नोटिस और समन जारी करते हुए हाजिर होने को कहा था लेकिन वह नहीं आए। ईडी ने मुझे बताया कि ललित मोदी ब्रिटेन में वैध पासपोर्ट के बिना रुके हुए हैं। कारण बताओ नोटिस और पासपोर्ट रद होने से भी बड़ा मसला लुकआउट नोटिस का है। इसके बाद भी यह महाशय (ललित मोदी) यूके में कैसे रह रहे हैं?
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान सुषमा स्वराज पर सवालों की झड़ी लगा दी। उन्होंने पूछा कि सरकार लगातार मांग किए जाने के बाद भी ब्रिटेन के मंत्री के साथ हुए पत्र व्यवहार को सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है?
विदेश मंत्री को ऐसा क्यों लगता है कि ललित मोदी के पास भारत का नहीं बल्कि यूके का यात्रा दस्तावेज होना चाहिए था? उन्होंने आगे कहा, ‘यदि यूपीए सरकार उन्हें (ललित मोदी) परेशान कर रही थी तो अरुण जेटली ने 16 में से 15 मामलों में शोकॉज नोटिस देने की पुष्टि क्यों की? क्या एनडीए सरकार भी उन्हें परेशान कर रही है?’ भाजपा इस मामले में लगातार मानवता के आधार पर की गई मदद बता रही है।
चिदंबरम ने इस पर भी सवाल उठाते हुए पूछा, ‘यदि मानवता ही असली कारण था तो मंत्री ने एक भारतीय नागरिक को अस्थायी यात्रा दस्तावेजों के लिए भारतीय हाई कमीशन के सामने उपस्थित होने के लिए क्यों नहीं कहा?’