केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश ने साफ कर दिया है कि नक्सल समस्या का हल बातचीत के जरिए नहीं निकाला जा सकता है।
रमेश ने आदिवासी इलाकों में विकास की जरूरत को दोहराते हुए कहा कि माओवादियों से बातचीत करने की कोई संभावना नहीं बची है, क्योंकि वे लोकतंत्र में यकीन नहीं करते। उन्होंने यह भी कहा कि माओवादी आदिवासी कल्याण करने के लिए वहां नहीं हैं।
बीते दिनों हुए नक्सली हमले पर भले ही कोई सरकारी नीति साफ नहीं नजर आ रही है, लेकिन सोनिया-मनमोहन के करीबी माने जाने वाले जयराम रमेश ने तेवर साफ कर दिए हैं। उन्होंने माओवादियों का समर्थन करने वाले कथित बुद्घिजीवियों पर भी निशाना साधा है।
सीएनएन आईबीएन से बातचीत में रमेश ने साफ किया कि माओवाद की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति बनाने की जरूरत है। रमेश ने कहा, 'राज्य में सख्त सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ पुलिस कार्रवाई की सख्त जरूरत है।'
रमेश ने यह भी माना कि नक्सलियों के साथ अन्याय होता रहा है और इसीलिए उन मामलों पर काम करने का वक्त है। साथ ही उन्होंने आदिवासी इलाकों में बेहतर और गहरी राजनीतिक पहुंच पर भी जोर दिया। रमेश ने कहा, 'दक्षिणी छत्तीसगढ़ में ऐसी शक्तियां हैं जो वहां कांग्रेस को मजबूत होते नहीं देखना चाहती हैं।'