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दूसरों के चेहरों पर मुस्कान ही इनकी असली कमाई है

Thu, 17 Jul 2014 12:03 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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आप अपनी नई नौकरी की पहली सैलरी से क्या करना चाहते हैं? शायद परिवार के लिए उपहार...दोस्तों को शानदार पार्टी या फिर महीनों से सोच रखी कोई खास चीज खरीदना। लेकिन दिल्ली की रहने वाली हरलीन ने कुछ अलग किया। इलेक्ट्रॉनिक्स में बैचलर ऑफ इंजानियरिंग के बाद अपने पिता के काम में हाथ बंटा रहीं हरलीन ने अपनी पहली सैलरी उन छोटे-छोटे बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में दी जो उनके लिए वाकई 'जरूरी' थीं।
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उनके लिए इस काम में मदद की अमर उजाला और यूनिसेफ की ओर से चलाए जा रहे अभियान 'गुल्लक' ने। उन्होंने अपनी पहली सैलरी का बड़ा हिस्सा गुल्लक को सौंप दिया जिसे गुल्लक सीधे उन बच्चों तक पहुंचा सके। हरलीन कौर ने अपनी पहली सैलरी से अपने सपने पूरे करने के बजाय जरूरतमंद बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लानी जरूरी समझी और इस महाअभियान के साथ जुड़ गईं। इस अभियान के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों के पोषण और शिक्षा में मदद कर , उनके भविष्य को संवारने का प्रयास किया जा रहा है।

परिवार ने किया प्रोत्साहित
दिल्ली के संयुक्त परिवार में पली-बढ़ी हरलीन इस बारे में बताती हैं, ''मैं हमेशा से ही जरूरतमंद बच्चों की मदद करना चाहती हूं। गुल्लक में अपनी पहली सैलरी देने का निर्णय मेरा अपना है जिसमें मेरे परिवार ने मेरा साथ दिया है।''
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यह पूछने पर की हरलीन को 'गुल्लक' के बारे में जानकारी कहां से मिली , उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर उन्होंने इसके बारे में सुना था और इसके बारे में पढ़कर तय किया कि उन्हें इसके जरिए समाज के लिए कुछ करना है।
 
क्षमतानुसार करें मदद
हरलीन अपनी तरह ही युवाओं से गुजारिश करती हैं कि उन्हें भी अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंद बच्चों की मदद करनी चाहिए जिससे उनका भविष्य संवर सके। साथ ही , वह उन बच्चों से भी मिलने की ख्वाहिश रखती हैं जिनके भविष्य के लिए उन्होंने मदद की है।
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