जेल जा रहे बंदियों ने फिल्मी अंदाज में कैदी वाहन की छत काट डाली। एसपी आवास के पास चार बंदी चलती गाड़ी से कूदकर भाग निकले। बंदियों को भागता देख पुलिस ने घेराबंदी की और कुछ देर में उन्हें धर दबोचा।
मौके पर पहुंचे एएसपी ने बंदी सुरक्षा में तैनात दरोगा को अभिरक्षा से भागने का प्रयास करने वाले चारों बंदियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।
सोमवार को कोर्ट में पेशी के बाद 52 बंदियों से भरी कैदी वाहन शाम करीब साढ़े पांच बजे जिला कारागार के लिए रवाना हुआ। वाहन एसपी आवास के पास पहुंचा था कि उसकी छत काटकर चार बंदी छत पर चढ़ गए।
भनक लगने पर पुलिस ने दौड़कर पकड़े चारों आरोपी
गंगाघाट थानाक्षेत्र के चंपापुरवा गांव निवासी शातिर बदमाश नूर आलम पुत्र मुन्ना और लूट व हत्या समेत दो दर्जन मुकदमों में एक साल से जेल में बंद बीघापुर थानाक्षेत्र के अमीरखेड़ा निवासी बंदी राजेंद्र लोध पुत्र बंशीलाल, 11 महीने से जेल में बंद औरास के बरादेव तोंदा गांव निवासी शिवा पुत्र सुघर सिंह और बीघापुर के छुलिहा गांव निवासी ओमप्रकाश पुत्र रमेश कैदी चलते वाहन के छत से कूद कर भाग निकले।
इस दौरान बंदी सुरक्षा में मौजूद दरोगा शिवराज सिंह आगे चालक के बगल वाली सीट पर बैठे थे और सिपाही शिवराज सिंह और मो. इमरान गाड़ी में पीछे बैठे थे। सिपाहियों की नजर पड़ी तो उन्होंने शोर मचाया। गाड़ी रुकवाकर भाग रहे बंदियों का पीछा किया। बंदी जेल गेट की ओर से हरदोई रोड की ओर भागने लगे।
शोर सुनकर स्वाट टीम के जवान देवी यादव, दिलीप तोमर, रामप्रकाश, शिवमणि यादव भी मौके पर पहुंचे। सभी बंदियों के पीछे दौड़ पड़े। कुछ दूरी पर चारों को धर दबोचा। कंट्रोल रूप से मैसेज होते ही एएसपी रामकिशुन यादव, सीओ सिटी सर्वेश मिश्रा, कोतवाली प्रभारी सतीश कुमार गौतम दलबल के साथ मौके पर पहुंचे।
बंदियों ने सामूहिक रूप से बनाई थी योजना
चारों बंदियों को पकड़ने के बाद बंदी वाहन को जिला कारागार लेकर जाया गया जहां पर बंदियों की गिनती हुई। पुलिस के मुताबिक गाड़ी में कुल 52 बंदी थे और गिनती पूरी निकली। बंदी सुरक्षा में तैनात दरोगा संतोष राय ने चारों बंदियों के खिलाफ कोतवाली में तहरीर दी है।
गनीमत रही कि पुलिस जवानों की नजर पड़ गई वर्ना एक-एक कर तमाम बंदी भाग निकलने में सफल हो जाते। बंदियों ने सामूहिक रूप से इसकी योजना बनाई थी।
गाड़ी बंदियों से ठसाठस भरी थी और छत तोड़ने और भागने की भगन पुलिस जवानों को न लगे इसके लिए बंदी तेज आवाज में गाना-बजाना भी कर रहे थे। जेलर विनय कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस संबंध में बंदियों से बात की जाएगी।