भारत की इस्राइल से बढ़ती नजदीकियों के कारण राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को मंगलवार को फलस्तीनी छात्रों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा।
अबू दिस की अल कुद्स यूनिवर्सिटी में आयोजित प्रणब मुखर्जी के एक कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने जमकर नारेबाजी की और बैनर लहराकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
परिसर में छात्रों के प्रदर्शन से स्थिति इतनी असहज हो गई कि राष्ट्रपति को यूनिवर्सिटी का अपना कार्यक्रम तो छोटा करना ही पड़ा, साथ में जवाहरलाल नेहरू हाईस्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम को भी रद्द कर दिया गया।
यह प्रदर्शन उस वक्त हुआ है, जब इस्राइल और फलस्तीन के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर है और जिसमें अब तक सैकड़ों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। मंगलवार को भी दोनों पक्षों के बीच हुई ताजा हिंसा में दोनों पक्षों के कम से कम पांच लोग मारे गए, जबकि पांच जख्मी हो गए।
राष्ट्रपति का काफिला भी बंटा
दरअसल, जब राष्ट्रपति अल कुद्स विश्वविद्यालय पहुंचे तो यहां तकरीबन 1000 छात्र यूनिवर्सिटी परिसर में प्रदर्शन करने लगे। थोड़ी देर तो फलस्तीन के सुरक्षा बलों ने छात्रों को रोके रखा लेकिन छात्रों के भारी विरोध और नारेबाजी को देखते हुए राष्ट्रपति प्रणब अल कुद्स विश्वविद्यालय से भारतीय विश्वविद्यालयों के सहयोग समझौते के कार्यक्रम में नहीं रुके।
इसके बाद उन्हें जवाहरलाल नेहरू हाईस्कूल जाना था जिसे विरोध को देखते हुए रद्द कर दिया गया। राष्ट्रपति के काफिले को ज्यों ही सुरक्षित रवाना किया गया, छात्रों ने सड़क पर टायरों में आग लगा दी जिसके कारण काफिले की बाकी गाड़ियां फंस गईं।
इन गाड़ियों को दूसरे रास्ते से इस्राइल रवाना किया गया। हालांकि, पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक इसी यूनिवर्सिटी में राष्ट्रपति को डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया और उन्हें ‘नाइट ऑफ पीस’ बताया गया।
राष्ट्रपति जी, हमारी बात सुनिए
जब प्रणब यूनिवर्सिटी कैंपस से निकल रहे थे तो फलस्तीनी छात्रों ने कई तीखे सवालों वाले बैनर और पोस्टर लहराए। इन पर लिखा था भारतीय राष्ट्रपति जी हमारी बात सुनिए।
कुछ पोस्टरों पर लिखा था कि आप हमारे दुश्मन के साथ क्यों सहयोग बढ़ा रहे हैं और आप इस्राइल की यात्रा क्यों कर रहे हैं, जबकि वह हमारी अर्थव्यवस्था को तबाह कर रहा है।
भारत हमारे क्षेत्रों पर जबरन कब्जा जमाने वालों (इस्राइल) से सहयोग क्यों कर रहा है। एक बैनर में राष्ट्रपति प्रणब से इस्राइली आक्रामकता के खिलाफ आवाज उठाने को कहा गया। वहीं एक और बैनर में भारतीय राष्ट्रपति से फलस्तीनियों की हत्या करने वालों के खिलाफ चुप्पी तोड़ने को कहा गया।
पारंपरिक विदाई भी नहीं हो सकी प्रणब की
छात्रों के विरोध के कारण राष्ट्रपति का फलस्तीन में आधिकारिक विदाई कार्यक्रम भी नहीं हुआ और वे वहां से सीधे यरूशलम आ गए। राष्ट्रपति मुखर्जी इस्राइल आने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति हैं।
इस्राइल में वे यहां की संसद को भी संबोधित करेंगे। उनके सम्मान में इस्राइल के राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन रात्रि भोज और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दोपहर के भोज का आयोजन किया है। इसके अलावा यरूशलम स्थित हिब्रू विश्वविद्यालय में उन्हें मानद उपाधि से भी सम्मानित किया जाएगा।
मध्य पूर्व में शांति भारत के हित में: प्रणब
यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में छात्रों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता भारत के हित में है। उन्होंने गाजा में बनने वाले दूसरे आईटी सेंटर बनाने के अलावा फलस्तीन से ऐतिहासिक संबंधों को गति देने वाले त्रिस्तरीय ढांचे का भी प्रस्ताव दिया।
उन्होंने इस मौके पर भारतीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग स्कॉलरशिप प्रोग्राम को बढ़ाने और अल कुद्स यूनिवर्सिटी में इंडिया चेयर बनाए जाने का एलान किया।
राष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी को बगैर संचार प्रणाली के 30 कंप्यूटरों को बतौर तोहफा दिया। संचार प्रणाली देने पर इस्राइल ने नियमों का हवाला देते हुए रोक लगा दी थी। उन्होंने भारत सरकार के मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत फलस्तीनियों को भारत आने का न्योता भी दिया।
राष्ट्रपति ने इस्राइल में होलोकास्ट मेमोरियल का दौरा किया
यरूशलम। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मंगलवार को अपने तीन दिवसीय दौरे पर इस्राइल पहुंचे। यहां उन्होंने होलोकास्ट मेमोरियल का दौरा भी किया।
यह मेमोरियल नरसंहार के शिकार लोगों की याद में बनाया गया है। उनके साथ इस्राइली राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन भी साथ में थे। प्रणब ने यहां के विजिटर बुक पर दस्तखत भी किया।
भारत बदलेगा फलस्तीन विवि को दिए जाने वाले संचार उपकरण
नई दिल्ली। भारत ने मंगलवार को कहा कि वह राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की ओर से फलस्तीनी विश्वविद्यालय को तोहफे के तौर पर दिए जाने वाले संचार उपकरणों को बदलेगा।
इस्राइल ने सुरक्षा कारणों के मद्देनजर इन उपकरणों के प्रवेश की अनुमति नहीं दी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा कि खास फ्रिक्वेंसी वाले चार संचार उपकरण इस्राइल के नियमों के अनुकूल नहीं हैं। हम उनकी जगह इस्राइल के नियमों के मुताबिक फ्रिक्वेंसी वाले संचार उपकरण देंगे।