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भारतीय वायु सेना की शान बढ़ाएगा 'तेजस'

Sat, 21 Dec 2013 12:50 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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देश के पहले स्वदेश निर्मित लड़ाकू विमान तेजस ने शुक्रवार को एक मील का पत्थर पार कर लिया। 30 सालों की लंबी कोशिशों के बाद आखिरकार तेजस को शुरुआती परिचालन क्लीयरेंस (आईओसी-2) मिल गया।
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इससे यह विमान वायुसेना में शामिल होने के करीब पहुंच गया है। हल्का लड़ाकू विमान तेजस वायुसेना में मिग-21 विमानों की जगह लेगा।

माना जा रहा है कि लगभग 25,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इन विमानों को अगले साल के आखिर तक अंतिम मंजूरी भी मिल जाएगी और तब ये युद्ध के मैदान में गरजने के लिए तैयार रहेंगे।

रक्षा मंत्री एके एंटनी की ओर से शुक्रवार को एक समारोह में वायुसेना प्रमुख एनएके ब्राउन को विमान के रिलीज टु सर्विस सर्टिफिकेट सौंपने के साथ भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जो लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता रखते हैं। इस मौके पर एंटनी ने कहा कि पिछले तीन साल के दौरान तेजस की क्षमताओं को काफी बढ़ाया गया है।
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इसकी बढ़ी क्षमताओं को देख कर ही वायुसेना इसे आईओसी-2 जैसा उच्च स्तर देने को राजी हुई है।

आईओसी-2 का मतलब यह है कि एक साथ कई काम करने वाला सिंगल इंजन का यह हल्का लड़ाकू विमान अलग-अलग परिस्थितियों में बखूबी उड़ान भर सकता है और इसे वायुसेना के रेगुलर पायलट उड़ा सकते हैं।

हालांकि फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (उड़ने के लिए आखिरी अनुमति -एफओसी) के लिए अभी इसे कई अहम इम्तिहानों से गुजरना होगा। वायुसेना तेजस के लिए दो स्कवाड्रन बनाएगी। यह काम 2015 से शुरू हो जाएगा।

एफओसी अगले साल मिलेगी , जो बेहद अहम होगी। लंबे कार्यक्रम और भारी लागत की बात मानते हुए एंटनी ने कहा कि 2006 में जब वह रक्षा मंत्री बने थे तभी से इस हल्के लड़ाकू विमान के भविष्य को लेकर चिंतित थे।

यह परियोजना 1983 में शुरू हुई थी और उस समय इसकी लागत 560 करोड़ रुपये थी लेकिन अब विमान के नौसेना और ट्रेनर संस्करण तैयार करने तक पूरी लागत 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी।
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हालांकि डीआरडीओ ने कहा है कि वायुसेना के लिए तेजस के संस्करण तैयार करने में 8000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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