मुंबई उच्च न्यायालय ने दुष्कर्म के एक मामले पर सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय का यह फैसला समाज में लगातार बढ़ रहे दुष्कर्म के मामलों के लिए नकेल साबित होगा।
टीओई की रिपोर्ट के अनुसार उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक मामले पर फैसला सुनाते हुए कहा कि दुष्कर्म साबित करने के लिए पीड़िता के शरीर में चोंट के निशान होना जरूरी नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि दुष्कर्म से महिला की आत्मा घायल होती है इसलिए इस अपराध को साबित करने के लिए उसका बयान ही काफी है।