भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष का विरोध रंग लाया है। सरकार को इस मामले में मुंह की खानी पड़ी है। मोदी सरकार द्वारा किए गए अहम बदलावों को खुद भाजपा सांसदों ने ही प्रस्ताव के जरिए वापस लिया है।
बताया जा रहा है कि अब नए भूमि अधिग्रहण बिल में भी वर्ष 2013 के बिल के लगभग सभी प्रावधान होंगे। कार्यप्रणाली से जुड़े मात्र तीन-चार सुधार ही नए बिल में होंगे।
सूत्रों के अनुसार मामले पर बनी संसद की संयुक्त समिति ने पुराने कानून के लगभग 80 प्रतिशत प्रावधानों को अपनाने का निर्णय लिया है। सूत्र बताते हैं कि खुद भाजपा सांसदों ने ही मोदी सरकार द्वारा किए बदलावों को प्रस्ताव के जरिए वापस ले लिया है।
बताया जा रहा है कि औद्योगिक कॉरिडोर का मामला हवा हो गया है तो 2013 के भूमि अधिग्रहण बिल में मौजूद आपत्ति के प्रावधान,सामाजिक प्रभाव आकलन, निजी पहचान, प्रावधान 10ए और अधिकारियों के बचाव संबंधित प्रावधानों को नए बिल में जोड़ा गया है।
कहा जा रहा है कि समिति में 2013 के बिल के समर्थकों की संख्या को देखते हुए सरकार को मजबूर होकर यह निर्णय लेना पड़ा है। विकास का नारा देकर जहां सरकार अपने इस बिल की पैरवी कर रही थी, वहीं संयुक्त संसदीय समिति ने उसके अरमानों पर पानी फेर दिया है। विपक्ष की सभी छह मांगों को समिति ने मान लिया है। सरकार के महज चार बदलाव मंजूर हुए हैं।