तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से वर्ष 1975 में देश पर आपातकाल थोपने को स्वतंत्र भारत का सबसे काला दौर करार देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि आज दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए तानाशाह बनना संभव नहीं है।
वित्त मंत्री ने कहा कि आपातकाल वो दौर था, जिसने यह दिखाया कि संविधान के कुछ प्रावधानों का इस्तेमाल कर लोकतंत्र को तानाशाही में बदला जा सकता है। इससे नौकरशाही, पुलिस, मीडिया और न्यायपालिका जैसी संस्थाएं ध्वस्त हो सकती हैं।
वित्त मंत्री ने कहा कि आज वैश्विक स्तर पर जागरूकता लोकतंत्र के पक्ष में है। तानाशाही में जिस तरह के प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं वही उस व्यवस्था के खिलाफ सबसे प्रभावी प्रतिरोध है।
मीडिया भी आज मजबूत है। राज्य व्यवस्था और वैश्विक संस्थाएं भी मजबूत हैं। दुनिया यह कत्तई स्वीकार नहीं करेगी कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र तानाशाही बन जाए।
भाजपा के वयोवृद्ध नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा आपातकाल की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं करने संबंधी बयान पर उठे विवाद के बीच जेटली ने कहा कि तकनीकी विकास के कारण मीडिया पर आज प्रतिबंध संभव नहीं हैं। आज इंटरनेट के जरिए खबरों का प्रसार हो रहा है और इंटरनेट पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता।
आपातकाल के दौर के अपने अनुभव को याद करते हुए जेटली ने कहा कि न्यायपालिका आज ज्यादा स्वतंत्र है और आज उसकी स्वतंत्रता आपातकाल की तरह किसी तानाशाही रवैये से बाधित नहीं किया जा सकता।
राजे ने रद किया लंदन दौरा
जयपुर। आईपीएल के पूर्व प्रमुख ललित मोदी के साथ संबंधों को लेकर पैदा विवाद के बीच राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 26 जून से निर्धारित लंदन दौरा रद कर दिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस रद करने का कारण दिल्ली में 27 जून को होने वाली नीति आयोग की बैठक बताया है।