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डॉन का कोर्ट जाने से इंकार, बोला सड़कें खराब हैं

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ट्रायल के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाने को परेशानी बताने पर सुप्रीम कोर्ट ने अंडरवर्ल्ड डॉन बबलू श्रीवास्तव को फटकार लगाई है।
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उच्चतम न्यायालय ने बबलू से कहा कि अलग-अलग जगहों पर सात हत्या का आरोप लगा है और अब आपको देश की सड़कें खराब लग रही हैं।

55 साल के बबलू श्रीवास्तव ने याचिका दाखिल कर यूपी से बाहर चल रहे मामलों का ट्रायल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कराने का निर्देश देने की गुहार की थी।

उसका कहना था कि पिछले 21 वर्षों में मुकदमों के सिलसिले में उसे हजारों किलोमीटर इधर-उधर ले जाया जा चुका है। ऐसे में बेहतर होगा कि ट्रायल वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हो।

न्यामयूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने बबलू को किसी तरह की राहत देने से इनकार करते हुए उचित कोर्ट के समक्ष याचिका दाखिल करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि राहत न मिलने की स्थिति में वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है।
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'हत्या के सात मुकदमे हैं और अब देश की सड़कें खराब लग रही हैं'

पीठ ने पाया कि बबलू पर हत्या, हत्या की साजिश, उगाही आदि के 46 मुकदमे देश के विभिन्न जगहों में दर्ज हैं। इनमें से सात हत्या के मामले हैं, जो यूपी के अलावा सूरत (गुजरात) और पुणे (महाराष्ट्र) में चल रहे हैं।

ऐसे में पीठ को बबूल की यह दलील नागवार गुजरी कि ट्रायल के सिलसिले में वह अब तक हजारों किलोमीटर की यात्रा कर चुका है।

दूसरी ओर बबलू की ओर से पेश वकील ने कहा कि बदनामी खराब चरित्र से भी बदतर है। बबलू कई मामलों में बरी हो चुका है। उसे अंतरराष्ट्रीय करार के तहत करीब 21 वर्ष पहले सिंगापुर से लाया गया था।

यहां बबलू के मानवाधिकार के साथ अंतरराष्ट्रीय करार का भी उल्लंघन किया जा रहा है। बता दें कि बरेली जेल में बंद बबलू पर यूपी के साथ दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात आदि में भी मुकदमे चल रहे हैं।

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