केंद्रीय गृह सचिव की ओर से फोन कर उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी को इस्तीफा देने के लिए कहने पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद आपत्ति जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि आखिरकार गृह सचिव एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को इस्तीफा देने के लिए कैसे कह सकते हैं?
सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। इतना ही नहीं शीर्ष अदालत ने यह भी पाया कि पुडुचेरी के पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र कटारिया को तो केंद्रीय गृह सचिव ने नहीं बल्कि उनके निजी सचिव ने फोन कर इस्तीफा देने के लिए कहा था।
इन दोनों को 2014 में राज्यपाल के पद से हटाया गया था। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने इन दोनों मसले पर केंद्र से जवाब देने को कहा है।
पीठ के समक्ष अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि किसी ने कुरैशी को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा। राष्ट्रपति ने कुरैशी द्वारा बलात्कार से संबंधित बयान पर सफाई मांगी थी, जिसके बाद गृह सचिव ने राज्यपाल को फोन किया था लेकिन उन्होंने राज्यपाल को इस्तीफा देने के लिए नहीं कहा था।
रोहतगी ने यह भी कहा कि वैसे भी गृह सचिव सरकार का नोडल अधिकारी होता है, वह फोन कर सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि जब तक कोई दबाव नहीं डाला गया हो गृह सचिव इस तरह की बात कैसे कर सकते हैं।