भाजपा से नजदीकियों की चर्चा को खारिज करते हुए कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि जो लोग नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करने पर उन्हें सजा देने की मांग कर रहे हैं, वे उनके बयान को ठीक ढंग से समझ ही नहीं पाए हैं। इसलिए उन्हें ऐसे लोगों से बात करने की चिंता नहीं है।
इस बीच थरूर ने ट्वीट कर यह भी कहा, ‘महात्मा गांधी ने न सिर्फ बाहरी सफाई की बात कही थी बल्कि उन्होंने दिमाग, दिल और आत्मा की सफाई की बात भी कही थी। इसलिए मेरी पीएमओ से अपील है कि वे कट्टरता, घृणा, असहिष्णुता से भारत को मुक्ति दिलाकर उसे स्वच्छ बनाए।
स्वच्छ भारत अभियान पर मोदी के निमंत्रण पर थरूर की ओर से सकारात्मक जवाब के चलते विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस की केरल यूनिट के नेता तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
'कुछ लोग मुझे बाहरी समझते हैं'
थरूर ने कहा, ‘सच्चाई तो यह है कि हम हमारी राजनीति में फर्क नहीं करते। अगर कोई जटिल विचारों के रूप में अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करता है, तो कोई समझ नहीं पाता। कुछ लोग मुझे बाहरी समझते हैं। शायद इसी वजह से कुछ लोगों को यह हजम करने में मुश्किल होती है कि मैं कौन हूं और मैं कैसा व्यवहार करता हूं।’
थरूर ने एक टीवी चैनल से कहा कि वह उन लोगों से अलग हैं, जिन्होंने अपना जीवन राजनीति और देश सेवा व पार्टी सेवा को समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा, ‘मेरा कैरियर अलग था। मैं राजनीति में काफी देर से आया हूं।
शायद कुछ असंगतियां होने की वजह से इस तरह की टिप्पणी की जा रही हैं।’ उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान का समर्थन करने का मतलब यह नहीं है कि वह भाजपा से जुड़ने वाले हैं।
यह पूरी तरह से बकवास है। थरूर ने कहा कि जो लोग सार्वजनिक रूप से आलोचना कर रहे हैं, वे सीधे उनसे भी बात कर सकते थे।
कांग्रेस के अखबार ने थरूर पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करके अपनी ही पार्टी नेताओं के निशाने पर चल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर पर कांग्रेस के ही एक समाचार पत्र ने निशाना साधा है।
कांग्रेसी समाचार पत्र ‘वीक्षणम’ में लिखे गए संपादकीय में उनकी संगठन के प्रति उनकी वफादारी पर संदेह जताया है।
संपादकीय में किसी का नाम लिए बिना कहा गया है कि जो लोग सोशल मीडिया के जरिए मोदी को ‘प्रेम पत्र’ लिखते हैं और संपादकीय पन्नों पर खुशामद से भरे लेख लिखते हैं, उनकी वफादारी पर संदेह किया जाएगा। इस लेख में विदेश नीति के मुद्दों पर थरूर की विशेषज्ञता के कई संदर्भ परोक्ष रूप से शामिल किए गए हैं।
लेख का अंत मलयालम की एक कहावत के साथ किया गया है, ‘कोई पेड़ यदि घर के लिए खतरा बन गया हो तो उसे गिरा देना चाहिए, फिर चाहे उस पर सोना ही क्यों न उगता हो।’ संपादकीय में कहा गया है कि यह बेहद अजीब है कि कांग्रेस में जिस व्यक्ति को प्रवक्ता का दर्जा हासिल है, वही मोदी की तारीफें करने में जुटा हुआ है। यह एक तरह से विश्वास घात है।