केरल हाईकोर्ट ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री शशि थरूर के खिलाफ निचली अदालत में चल रहे राष्ट्रगान के अनादर के मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
जस्टिस एसएस सतीशचंद्रन ने थरूर की याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया। याचिका में एर्नाकुलम के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत के राष्ट्रीय सम्मान संरक्षण अधिनियम 1971 की धारा 111 के तहत मुकदमा शुरू करने के आदेश को थरूर ने चुनौती दी थी।
मामला 16 दिसंबर, 2008 का है। उस दिन फेडरल बैंक की ओर से आयोजित एक सभा में राष्ट्रगान के दौरान थरूर ने लोगों से कथित रूप से अमेरिका की तर्ज पर दाहिना हाथ छाती पर रखने को कहा था। थरूर उस समय सांसद थे। थरूर की याचिका खारिज होने के बाद अब निचली अदालत में उनके खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही आगे बढ़ सकेगी।
थरूर के विरुद्ध यह मामला मानवाधिकार संरक्षण केंद्र के महासचिव जाय कैथरथ की एक निजी शिकायत पर चलाया जा रहा है। शिकायत में कहा गया है कि थरूर के चलते राष्ट्रगान के गायन के दौरान सावधान की मुद्रा में रहने की अनिवार्यता भंग हुई।
हाईकोर्ट में दी अपनी याचिका में थरूर ने बैंक की ओर से उस सभा की रिकॉर्डेड सीडी को भी अदालत में पेश कराने की मांग की, जिसे पीठ ने खारिज कर दिया। पीठ ने कहा कि सुनवाई से पहले किसी दस्तावेज को बेगुनाही साबित करने के लिए अदालत में मंगवाने के लिए नहीं कहा जा सकता है।